सेना ने रोहतक से चंडीमंदिर तक दान में मिली किडनी को किया एयरलिफ्ट

सेना ने रोहतक से चंडीमंदिर तक दान में मिली किडनी को किया एयरलिफ्ट

भारतीय सेना (Indian Army) केवल देश की सीमाओं की रक्षा करने और बाहरी दुश्मनों से मुकाबला करने के लिए ही नहीं जानी जाती, बल्कि अपने जवानों और देश के आम नागरिकों के जीवन की रक्षा के लिए वह किस हद तक समर्पित है, इसका एक और रोंगटे खड़े कर देने वाला और प्रेरणादायक मामला सामने आया है। मानवीय संवेदनाओं और असाधारण सैन्य कौशल का एक अनूठा उदाहरण पेश करते हुए भारतीय सेना ने हरियाणा के रोहतक से लेकर चंडीमंदिर तक एक बेहद संवेदनशील और जिंदगी बचाने वाले मेडिकल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। इस साहसिक अभियान के तहत रोहतक में एक दानदाता से प्राप्त की गई किडनी (Kidney) को कम से कम समय में चंडीमंदिर स्थित कमांड अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाना था, ताकि एक जरूरतमंद सैनिक की जान बचाई जा सके। सड़क मार्ग से इस दूरी को तय करने में भारी ट्रैफिक और लंबी दूरी के कारण कई घंटे लग सकते थे, जिससे अंग के खराब होने का भारी जोखिम पैदा हो गया था। ऐसे में संकट की इस घड़ी में भारतीय सेना के एविएशन कोर ने फौरन मोर्चा संभाला और वायुसेना के समन्वय से अंग को हेलीकॉप्टर के जरिए तेजी से एयरलिफ्ट कर समय पर अस्पताल पहुंचाया, जिससे एक वीर सैनिक को नई जिंदगी का अनमोल उपहार मिल सका।

अंग दान और मेडिकल इमरजेंसी: क्यों समय का एक-एक सेकंड था बेहद कीमती और महत्वपूर्ण

चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) के क्षेत्र में जब भी किसी अंग प्रत्यारोपण यानी ऑर्गन ट्रांसप्लांट (Organ Transplant) की बात आती है, तो सबसे बड़ी चुनौती समय की होती है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में 'कोल्ड इस्केमिया टाइम' (Cold Ischemia Time) कहा जाता है। एक बार शरीर से निकाले जाने के बाद किडनी जैसे संवेदनशील अंग को सीमित घंटों के भीतर ही मरीज के शरीर में प्रत्यारोपित करना अनिवार्य होता है, अन्यथा अंग के ऊतक नष्ट होने लगते हैं और वह किसी काम का नहीं रहता। रोहतक के एक अस्पताल में जब एक अंगदाता के परिवार ने समझदारी और उदारता दिखाते हुए किडनी दान करने का फैसला किया, तो डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी बाधा यह थी कि उस अमूल्य अंग को जितनी जल्दी हो सके चंडीमंदिर कमांड अस्पताल तक कैसे पहुंचाया जाए। सड़क मार्ग पर एंबुलेंस से ले जाने पर ट्रैफिक जाम और सड़क की स्थिति के कारण देरी होने का पूरा अंदेशा था, जिससे मरीज की जान खतरे में पड़ सकती थी। इस गंभीर संकट को भांपते हुए तुरंत सैन्य अधिकारियों और चिकित्सा विशेषज्ञों ने आपातकालीन योजना बनाई और बिना एक पल गंवाए रोहतक से चंडीमंदिर के बीच एक 'ग्रीन कॉरिडोर' और एयरलिफ्ट ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार की, जिसने इस असंभव दिखने वाले काम को मुमकिन बना दिया।

भारतीय सेना का मानवीय चेहरा: कैसे ऑपरेशनल तत्परता और तालमेल ने बचाई एक अनमोल जान

भारतीय सेना के जवानों की यह खूबी रही है कि वे युद्ध के मैदान में जितने आक्रामक और रणनीतिक होते हैं, आपदा या चिकित्सा आपातकाल के समय वे उतने ही संवेदनशील और मददगार साबित होते हैं। रोहतक से चंडीमंदिर के इस एयरलिफ्ट मिशन के दौरान सेना के पायलटों, तकनीकी टीम और मेडिकल कॉर्प्स के डॉक्टरों के बीच गजब का तालमेल देखने को मिला। जैसे ही दान में मिली किडनी को सुरक्षित तरीके से पैक किया गया, सेना का विशेष हेलीकॉप्टर तय समय पर रोहतक में उतरा और वहां से मेडिकल टीम के साथ उड़ान भरकर निर्धारित कम समय में चंडीमंदिर कमांड अस्पताल के हेलीपैड पर जा उतरा। अस्पताल में पहले से ही सर्जिकल टीमें पूरी तरह से तैयार बैठी थीं ताकि बिना एक भी सेकंड की देरी के ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू की जा सके। सेना के इस त्वरित और अनुशासित कदम ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया कि देश की रक्षा करने वाले ये वीर जवान अपने ही साथियों और देशवासियों की जिंदगी बचाने के लिए किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। सोशल मीडिया और तमाम जनपदों में सेना के इस मानवीय और साहसिक कार्य की हर तरफ भूरी-भूरी प्रशंसा की जा रही है, और लोग इसे रक्षा बलों की एक और बड़ी जीत मान रहे हैं।

अंगदान के प्रति बढ़ती जागरूकता और देश के स्वास्थ्य ढांचे में सैन्य बलों का अमूल्य योगदान

इस पूरी घटना ने देश भर में अंगदान (Organ Donation) के महत्व को एक बार फिर से बहुत ही मजबूती के साथ लोगों के सामने रखा है, क्योंकि एक व्यक्ति का दान किया गया अंग किसी दूसरे इंसान को नया जीवन दे सकता है। भारत में अंगदान को लेकर जागरूकता धीरे-धीरे बढ़ रही है, लेकिन अभी भी बहुत से लोग इसके प्रति संकोच करते हैं, ऐसे में रोहतक की इस घटना से समाज को एक सकारात्मक संदेश मिला है कि मृत्युरोपरांत या स्वेच्छा से किया गया दान कितना महत्वपूर्ण हो सकता है। इसके साथ ही, देश के रक्षा बलों ने यह दिखा दिया है कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ देश के भीतर मेडिकल इमरजेंसी और आपदा प्रबंधन जैसी जटिल परिस्थितियों से निपटने में भी कितनी अहम भूमिका निभाते हैं। जिस सैनिक को इस सफल एयरलिफ्ट और समय पर हुए ऑपरेशन के बाद नई जिंदगी मिली है, वह अब पूरी तरह स्वस्थ होने की राह पर है। सेना के इस प्रेरणादायक कार्य ने देश के हर नागरिक के दिल में जवानों के प्रति सम्मान और बढ़ा दिया है, और यह घटना इतिहास के पन्नों में मानवीय सेवा और अदम्य साहस की एक मिसाल के रूप में हमेशा याद रखी जाएगी।

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