वोटर आईडी कार्ड नहीं होने पर भी बेझिझक डाल सकेंगे वोट, निर्वाचन आयोग ने इन 11 वैकल्पिक दस्तावेजों को दी मंजूरी
राजस्थान में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों की सुगबुगाहट के बीच राज्यभर के मतदाताओं के लिए एक बेहद राहत भरी और काम की खबर सामने आई है। अक्सर मतदान के ठीक वक्त पर यह बड़ी समस्या देखने को मिलती है कि तमाम कोशिशों के बावजूद कई नागरिकों का मतदाता पहचान पत्र (Voter ID Card/EPIC) या तो खो जाता है, या घर पर छूट जाता है या फिर किसी तकनीकी गलती के कारण समय पर हाथ नहीं लग पाता है। ऐसे में मतदाताओं के मन में यह घबराहट होना स्वाभाविक है कि क्या वे अपने मताधिकार के पवित्र अधिकार से वंचित रह जाएंगे? इस आम समस्या को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि आपका नाम संबंधित क्षेत्र की वोटर लिस्ट यानी मतदाता सूची में दर्ज है, तो केवल वोटर आईडी कार्ड न होने मात्र से आपको वोट डालने से नहीं रोका जाएगा। आयोग ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करते हुए कुल 11 ऐसे वैकल्पिक फोटोयुक्त दस्तावेजों को पूरी तरह वैध करार दिया है, जिन्हें पोलिंग बूथ पर दिखाकर हर योग्य नागरिक आसानी से अपना वोट डाल सकता है। लोकतंत्र के इस महापर्व में भाग लेने जा रहे हर मतदाता के लिए इन नियमों और वैकल्पिक व्यवस्थाओं की पूरी जानकारी होना बेहद आवश्यक है ताकि मतदान केंद्र पर किसी भी तरह की असुविधा से बचा जा सके।
वोटर लिस्ट में नाम होना है सबसे पहली और अनिवार्य शर्त
चुनावी प्रक्रिया के जानकारों और निर्वाचन विभाग का यह स्पष्ट कहना है कि भले ही चुनाव आयोग ने पहचान पत्र के रूप में कई विकल्प उपलब्ध करा दिए हों, लेकिन मतदान करने के लिए सबसे बुनियादी और पहली शर्त यह है कि संबंधित व्यक्ति का नाम उस वार्ड की आधिकारिक मतदाता सूची (Voter List) में दर्ज होना अनिवार्य है। केवल कोई भी पहचान पत्र होने मात्र से किसी को वोट डालने का अधिकार नहीं मिल जाता, जब तक कि बूथ पर मौजूद पीठासीन अधिकारी द्वारा इलेक्टोरल रोल में नाम का मिलान न कर लिया जाए। इसलिए मतदान केंद्र की लंबी कतारों में लगने से पहले हर मतदाता को यह सलाह दी जाती है कि वे ऑनलाइन माध्यम से या स्थानीय बीएलओ (BLO) की मदद से वोटर लिस्ट में अपना नाम अच्छी तरह जांच लें। इसके साथ ही अपने सटीक मतदान केंद्र (Polling Booth) की जानकारी भी पहले ही सुनिश्चित कर लेनी चाहिए ताकि ऐन वक्त पर किसी भी प्रकार की भागदौड़ या मानसिक तनाव से बचा जा सके।
मतदान केंद्र पर वोटर आईडी के विकल्प के रूप में कौन से 11 दस्तावेज हैं मान्य?
यदि आपके पास मुख्य मतदाता पहचान पत्र यानी एपिक कार्ड (EPIC) मौजूद नहीं है, तो घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। आप नीचे बताए गए 11 वैकल्पिक फोटोयुक्त दस्तावेजों में से किसी भी एक मूल दस्तावेज को पोलिंग बूथ पर दिखाकर अपनी पहचान साबित कर सकते हैं और मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं:
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आधार कार्ड (Aadhaar Card): देश का सबसे सर्वमान्य और व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला पहचान पत्र, जो मतदान के लिए पूरी तरह वैध है।
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मनरेगा जॉब कार्ड (MGNREGA Job Card): ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी ग्रामीण रोजगार और आजीविका मिशन से संबंधित फोटोयुक्त कार्ड।
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बैंक या डाकघर की पासबुक: किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक या पोस्ट ऑफिस द्वारा खाताधारक की तस्वीर के साथ जारी की गई अपडेटेड पासबुक।
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स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड: श्रम मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के तहत या आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत मिला फोटोयुक्त हेल्थ कार्ड।
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ड्राइविंग लाइसेंस (Driving Licence): परिवहन विभाग द्वारा अधिकृत वैध ड्राइविंग लाइसेंस, जिस पर मतदाता की स्पष्ट तस्वीर हो।
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पैन कार्ड (PAN Card): आयकर विभाग द्वारा जारी स्थायी खाता संख्या कार्ड, जो पहचान का एक मजबूत प्रमाण माना जाता है।
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भारतीय पासपोर्ट (Indian Passport): यदि आपके पास वैध पासपोर्ट है, तो आप विदेश यात्रा के अलावा मतदान के लिए भी इसका उपयोग कर सकते हैं।
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फोटोयुक्त पेंशन दस्तावेज: सरकार द्वारा सेवानिवृत्त कर्मचारियों या पेंशनभोगियों को जारी किए गए आधिकारिक पेंशनर्स कार्ड।
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सरकारी सेवा पहचान पत्र: केंद्र सरकार, राज्य सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) या पब्लिक लिमिटेड कंपनियों द्वारा अपने कर्मचारियों को दिए जाने वाले आईडी कार्ड।
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सांसद या विधायक के आधिकारिक पहचान पत्र: देश के माननीय सांसदों (MPs) और विधानसभा सदस्यों (MLAs) को प्रशासनिक रूप से जारी सरकारी पहचान पत्र।
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यूनिक डिसएबिलिटी आईडी (UDID Card): सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के लिए जारी विशेष पहचान पत्र।
डिजिटल युग में जरूरी सावधानियां और स्थानीय प्रशासन के कड़े इंतजाम
स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों को पारदर्शी, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और चुनाव आयोग ने चाक-चौबंद तैयारियां की हैं। इस बार डिजिटल और आधुनिक व्यवस्थाओं पर जोर दिया जा रहा है, जिसके तहत बूथ स्तर पर सुरक्षा और पहचान के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मतदाताओं को यह विशेष रूप से ध्यान रखना होगा कि वे जो भी वैकल्पिक दस्तावेज लेकर मतदान केंद्र पर जा रहे हैं, वह किसी फोटोकॉपी या डिजिटल फॉर्मेट के बजाय उसका मूल रूप (Original Document) होना चाहिए। फोटोकॉपी या मोबाइल में दिखाए गए दस्तावेजों को कई बार मतदान अधिकारियों द्वारा स्वीकार नहीं किया जाता है। स्थानीय निकाय चुनावों में हर एक वोट क्षेत्र के विकास की दिशा तय करता है, इसलिए बिना किसी डर या संकोच के अपने इन वैध दस्तावेजों को साथ रखें और लोकतंत्र के इस उत्सव में अपनी पूरी भागीदारी सुनिश्चित करें।