Kalashtami 2026: काल भैरव की कृपा और पुण्यफल पाना है, तो भूलकर भी न करें इन 10 नियमों की अनदेखी
हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का पावन व्रत रखा जाता है। यह दिन भगवान शिव के रौद्र रूप 'काल भैरव' की साधना और उपासना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। तंत्र-मंत्र और बाधाओं से मुक्ति दिलाने वाले इस व्रत में नियमों का पालन करना अनिवार्य है। अगर आप इस दिन पूजा का पूरा पुण्यफल पाना चाहते हैं, तो भूलकर भी इन 10 जरूरी नियमों की अनदेखी न करें।
कालाष्टमी पर इन 10 जरूरी बातों का रखें खास ध्यान
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तामसिक भोजन से दूरी: इस दिन पूरी तरह सात्विक रहें। मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन भूलकर भी न करें।
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काले कुत्ते को न सताएं: भगवान काल भैरव का वाहन कुत्ता माना गया है। इस दिन किसी भी कुत्ते को मारना या सताना भारी नुकसान पहुंचा सकता है।
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झूठ और कपट का त्याग: इस दिन किसी से झूठ न बोलें, न ही किसी के खिलाफ कोई साजिश या कपट रचें।
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घमंड से बचें: काल भैरव अहंकार का नाश करते हैं, इसलिए पूजा के दौरान मन में बिल्कुल भी घमंड न लाएं।
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माता-पिता का अपमान नहीं: इस दिन अपने माता-पिता और गुरुजनों का भूलकर भी अनादर या अपमान न करें।
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शमशान की ओर अकेले न जाएं: बिना किसी सिद्ध गुरु के मार्गदर्शन के तांत्रिक साधना के लिए आधी रात को सुनसान या शमशान घाट न जाएं।
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भैरव चालीसा का पाठ: पूजा के समय काल भैरव चालीसा और उनके मंत्रों का जाप पूरे नियम और शुद्ध उच्चारण के साथ ही करें।
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दान का महत्व: इस दिन भूखों या जरूरतमंदों को अपनी क्षमता के अनुसार अन्न या काले तिल का दान जरूर करें।
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अखंड ज्योति का ध्यान: यदि घर में भैरव देव के नाम का दीपक जलाया है, तो ध्यान रखें कि वह पूजा के संकल्प के समय तक बुझना नहीं चाहिए।
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क्रोध पर नियंत्रण: भगवान काल भैरव स्वयं रुद्र अवतार हैं, इसलिए इस दिन खुद के क्रोध और वाणी पर पूरी तरह नियंत्रण रखें।
काले कुत्ते को खिलाएं रोटी, चमकेगी किस्मत
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कालाष्टमी के दिन यदि आप किसी काले कुत्ते को सरसों का तेल लगी हुई रोटी या मीठे पुए खिलाते हैं, तो काल भैरव बेहद प्रसन्न होते हैं। ऐसा करने से कुंडली में मौजूद राहु-केतु के दोष शांत होते हैं और जीवन में आ रही तमाम परेशानियां व बीमारियां हमेशा के लिए दूर हो जाती हैं।