योगिनी एकादशी 2026: आज पढ़ें व्रत कथा, श्रीहरि की कृपा से मिटेंगे सारे कष्ट और पाप
आज एकादशी का पावन पर्व है, जिसे 'योगिनी एकादशी' के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और योगिनी एकादशी को समस्त पापों का नाश करने वाला माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की सच्चे मन से पूजा करने से न केवल सुख-समृद्धि प्राप्त होती है, बल्कि मनुष्य के अनजाने में किए गए पाप भी धुल जाते हैं। आइए, जानते हैं इस व्रत की पौराणिक कथा और पूजा का महत्व।
योगिनी एकादशी की पौराणिक व्रत कथा
प्राचीन कथा के अनुसार, अलकापुरी के राजा कुबेर का सेवक 'हेम' नाम का एक माली था। उसका मुख्य कार्य भगवान शिव की पूजा के लिए मानसरोवर से प्रतिदिन फूल लाना था। एक दिन वह अपनी पत्नी की सुंदरता में इतना खो गया कि फूल लाना भूल गया। जब राजा कुबेर को इस बात का पता चला, तो उन्होंने क्रोधित होकर हेम को श्राप दिया कि वह कोढ़ (कुष्ठ रोग) से पीड़ित होकर पृथ्वी पर भटकता रहेगा।
श्राप के कारण हेम माली बहुत दुखी हुआ और भटकते हुए महर्षि मार्कंडेय के आश्रम में पहुँचा। महर्षि ने उसके दुख का कारण जाना और उसे 'योगिनी एकादशी' का व्रत करने का सुझाव दिया। हेम ने श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन किया, जिसके प्रभाव से उसका कुष्ठ रोग दूर हो गया और उसे पुनः वैकुंठ लोक में स्थान प्राप्त हुआ। तभी से इस व्रत को 'योगिनी एकादशी' कहा जाता है, जो समस्त कष्टों का नाश करने वाली है।
श्रीहरि को प्रसन्न करने की पूजा विधि
योगिनी एकादशी के दिन श्रीहरि को प्रसन्न करने के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन करें:
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स्नान और संकल्प: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगाजल मिले जल से स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें।
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विष्णु पूजन: भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाएं। उन्हें तुलसी दल, पीले फूल, अक्षत, और नैवेद्य अर्पित करें।
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विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ: पूजा के दौरान 'विष्णु सहस्त्रनाम' या 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। यह मंत्र नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करने में अत्यंत प्रभावी है।
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दान-पुण्य: एकादशी के दिन सामर्थ्य अनुसार गरीबों को अन्न, वस्त्र या फल का दान करें। इससे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
इस व्रत के लाभ और महत्व
योगिनी एकादशी का व्रत न केवल आत्मिक शांति देता है, बल्कि यह जीवन के कठिन दौर से गुजर रहे लोगों के लिए वरदान के समान है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन निराहार रहकर भगवान विष्णु की कथा सुनता है, उसके जीवन से दरिद्रता और बीमारियों का नाश होता है। यह एकादशी 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर फल प्रदान करने वाली मानी गई है। आज का दिन अपने भीतर के विकारों को त्यागने और प्रभु की भक्ति में लीन होने का सबसे उत्तम अवसर है।