संन्यास के बाद घायल शेर की तरह गरजे बेन स्टोक्स: क्रैम्प और दर्द से जूझते हुए जड़ा मैच विनिंग शतक, अकेले दम पर जिताया मुकाबला

संन्यास के बाद घायल शेर की तरह गरजे बेन स्टोक्स: क्रैम्प और दर्द से जूझते हुए जड़ा मैच विनिंग शतक, अकेले दम पर जिताया मुकाबला

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने के कुछ ही दिनों बाद इंग्लैंड के स्टार ऑलराउंडर बेन स्टोक्स (Ben Stokes) ने घरेलू क्रिकेट में एक बार फिर साबित कर दिया कि क्यों उन्हें दुनिया का सबसे दमदार और फाइटर खिलाड़ी माना जाता है। इंटरनेशनल क्रिकेट से इमोशनल विदाई लेने के बाद डरहम (Durham) के लिए अपना पहला मुकाबला खेलने उतरे स्टोक्स ने मैदान पर 'घायल शेर' की तरह वापसी करते हुए मांसपेशियों के गंभीर खिंचाव (Cramp) और दर्द के बावजूद एक ऐतिहासिक नाबाद शतकीय पारी खेली और टीम को हारी हुई बाजी जिता दी।

डर्बीशायर के खिलाफ टीम को संभाला, शुरुआती झटकों के बाद दिखाया दम

डर्बी के मैदान पर खेले गए वन-डे कप मुकाबले में डरहम के सामने 257 रनों का लक्ष्य था। लक्ष्य का पीछा करने उतरी डरहम की शुरुआत बेहद खराब रही और महज 98 रन तक टीम के 3 प्रमुख बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे। मैच डर्बीशायर की पकड़ में पूरी तरह मजबूत नजर आ रहा था, तभी संकट मोचन बनकर क्रीज पर टिके बेन स्टोक्स ने मोर्चा संभाला।

क्रैम्प और दर्द से बेहाल, फिर भी नहीं छोड़ा मैदान

पारी के दौरान भीषण गर्मी और थकान के चलते बेन स्टोक्स भयंकर मंसल क्रैम्प (Muscle Cramp) और शारीरिक दर्द से जूझते हुए नजर आए। हालात यह थे कि उन्हें दौड़ने में भारी परेशानी हो रही थी, लेकिन इसके बावजूद इस दिग्गज खिलाड़ी ने मैदान नहीं छोड़ा। दर्द को दरकिनार करते हुए उन्होंने गजब का मानसिक और शारीरिक संयम दिखाया और क्रीज पर डटे रहे।

तूफानी पारी का अंत: स्टोक्स ने अपनी सूझबूझ और आक्रामक अंदाज का बेहतरीन मिश्रण दिखाते हुए 123 गेंदों पर नाबाद 108 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली। उनकी इस शानदार पारी में 10 बेहतरीन चौके और 3 गगनचुंबी छक्के शामिल रहे। उनके इस संघर्ष का ही नतीजा था कि डरहम ने 49.1 ओवर में 5 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया और 5 गेंद शेष रहते मुकाबला अपने नाम कर लिया।

गेंद से भी दिखाया कमाल

बल्लेबाजी से कोहराम मचाने से पहले बेन स्टोक्स ने अपनी गेंदबाजी से भी शानदार योगदान दिया। उन्होंने अपने कोटे के 9 ओवर में बेहद कंजूसी से गेंदबाजी करते हुए मात्र 38 रन खर्च किए और विपक्षी बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखा।

संन्यास के तुरंत बाद इस तरह का जज्बा दिखाना यह बयां करता है कि बेन स्टोक्स के भीतर क्रिकेट की भूख और टीम के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा अभी भी पूरी तरह जिंदा है। उनकी इस जांबाज पारी की सोशल मीडिया पर भी जमकर तारीफ हो रही है।

Latest Posts