लखनऊ में बनेगी देश की पहली नाइट सफारी; सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार के ₹1510 करोड़ के प्रोजेक्ट को दी हरी झंडी, जानिए क्या हैं शर्तें
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर चमकाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक और महत्वाकांक्षी योजना धरातल पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने लखनऊ के कुकरैल आरक्षित वन क्षेत्र (Kukrail Reserve Forest) में देश की पहली नाइट सफारी और प्राणी उद्यान (Zoological Park) स्थापित करने की ₹1,510 करोड़ की मेगा परियोजना को सशर्त मंजूरी दे दी है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए शीर्ष अदालत ने यह बड़ा फैसला सुनाया, जिसके बाद अब यूपी में पर्यटन और रोजगार के नए रास्ते खुलने वाले हैं।
देश की पहली और दुनिया की 5वीं नाइट सफारी होगी कुकरैल
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहाना की तीन सदस्यीय पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार के आवेदन को स्वीकार करते हुए यह ऐतिहासिक आदेश जारी किया। कोर्ट की हरी झंडी के साथ ही भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल होने जा रहा है जहां नाइट सफारी की सुविधा उपलब्ध है। वैश्विक स्तर पर सिंगापुर, चीन, थाईलैंड और इंडोनेशिया के बाद भारत ऐसा पांचवां देश होगा, जहां पर्यटक रात के समय वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देख सकेंगे।
'अम्यूजमेंट और एडवेंचर जोन' पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त रोक
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस इको-सेंसिटिव प्रोजेक्ट को मंजूरी देने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण को लेकर बेहद कड़े निर्देश जारी किए हैं। केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए अदालत ने साफ कर दिया है कि कुकरैल के आरक्षित वन क्षेत्र के भीतर किसी भी प्रकार के 'एडवेंचर जोन' या व्यावसायिक 'अम्यूजमेंट पार्क' (Amusement Park) के निर्माण पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा, ताकि जंगल की प्राकृतिक अखंडता को नुकसान न पहुंचे। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि किसी भी नियम का उल्लंघन होने पर बेहद सख्त कार्रवाई की जाएगी और इसकी निगरानी के लिए सीईसी सदस्य-सचिव हर तीन महीने पर साइट का दौरा करेंगे।
शिफ्ट होगा 100 साल पुराना लखनऊ चिड़ियाघर
इस मेगा प्रोजेक्ट के ब्लूप्रिंट के अनुसार, कुकरैल का कुल अधिसूचित वन क्षेत्र 2,027.4 हेक्टेयर का है, जिसमें से 855 एकड़ (लगभग 855.07 हेक्टेयर) हिस्से में नाइट सफारी और एक नया डे-जू (Day Zoo) विकसित किया जाएगा। इसी परियोजना के तहत लखनऊ के हजरतगंज इलाके में स्थित 100 साल से भी अधिक पुराने प्रसिद्ध नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान (Lucknow Zoo) को भी कुकरैल में शिफ्ट किया जाएगा। सरकार का तर्क है कि शहर के बीचों-बीच स्थित वर्तमान चिड़ियाघर में जानवरों के बाड़ों (Enclosures) के विस्तार के लिए बिल्कुल जगह नहीं बची है, जिसके कारण यह कदम उठाना बेहद जरूरी था।
71% हिस्सा रहेगा पूरी तरह ग्रीन; ट्रांसलोकेट होंगे पेड़
पर्यावरण के नुकसान के दावों पर यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया है कि कुल आवंटित 855 एकड़ क्षेत्र का 71 प्रतिशत हिस्सा (लगभग 610 एकड़) पूरी तरह से ग्रीन कवर (Green Cover) के रूप में बरकरार रखा जाएगा। वन क्षेत्र में मौजूद कुल 24,274 पेड़ों में से केवल 4,800 पेड़ों को ही काटने की अनुमति ली जाएगी, जबकि 877 पेड़ों को अत्याधुनिक तकनीक से बिना नुकसान पहुंचाए दूसरी जगह ट्रांसलोकेट (Translocate) किया जाएगा। इसके अलावा, क्षेत्र में मौजूद विदेशी और आक्रामक वनस्पतियों को हटाकर भारत के पारंपरिक स्थानीय (Native) छायादार पेड़ लगाए जाएंगे, जिससे स्थानीय पर्यावरण और मजबूत होगा।