बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम के चढ़ावे के कथित गबन पर बड़ा एक्शन! चेयरमैन के PA पर गिरी गाज

बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम के चढ़ावे के कथित गबन पर बड़ा एक्शन! चेयरमैन के PA पर गिरी गाज

उत्तराखंड के पवित्र बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम में चढ़ावे की राशि और वित्तीय लेनदेन में हुई कथित अनियमितताओं पर प्रशासन ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। दानपात्र में चढ़ाए गए करोड़ों रुपयों के गबन के मामले में पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए, मंदिर समिति के चेयरमैन के निजी सहायक (PA) को निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई ने मंदिर प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है और गबन के इस बड़े नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हो गई हैं।

कैसे खुला गबन का राज?

लंबे समय से मिल रही शिकायतों और गुप्त जांच के बाद यह सामने आया कि मंदिर के दानपात्रों से प्राप्त होने वाली नकदी का पूरा हिसाब नहीं रखा जा रहा था। जांच में पाया गया कि कुछ प्रभावशाली लोगों ने मिलीभगत कर चढ़ावे के पैसे को सीधे अपनी जेबों में डालने का एक सिस्टम बना रखा था। चेयरमैन के PA की भूमिका इसमें मुख्य रूप से सामने आई, जिस पर आरोप है कि उसने मंदिर प्रशासन के रिकॉर्ड में हेरफेर की और धन के हस्तांतरण को छिपाने में मदद की।

कार्रवाई की जद में कई अधिकारी

इस बड़े घोटाले में केवल PA ही नहीं, बल्कि मंदिर समिति के कुछ अन्य कर्मचारियों और स्थानीय बिचौलियों की भी संलिप्तता की जांच की जा रही है।

  • निलंबन और जांच: प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर PA को तुरंत प्रभाव से सेवा से हटा दिया गया है।

  • फॉरेंसिक ऑडिट: राज्य सरकार ने अब पूरे मामले का फॉरेंसिक ऑडिट करने का आदेश दिया है, ताकि पिछले कुछ वर्षों में हुए दान के हर एक पैसे का मिलान किया जा सके।

  • सुरक्षा व्यवस्था: मंदिर की सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अब दानपात्रों की निगरानी सीसीटीवी और डिजिटल लॉक-सिस्टम के जरिए की जाएगी।

आस्था बनाम अपराध

बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र हैं। यहाँ आने वाले श्रद्धालु अपनी गाढ़ी कमाई भगवान के चरणों में समर्पित करते हैं। ऐसे में इस पवित्र धनराशि का गबन न केवल एक आर्थिक अपराध है, बल्कि यह करोड़ों भक्तों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ भी है। राज्य सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि मंदिर के पैसे में हेराफेरी करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो।

आगे क्या कदम उठाएगा प्रशासन?

मामले की गंभीरता को देखते हुए अब मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। हर दिन के दान का हिसाब अब ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट होगा, जिसे सीधे उच्च अधिकारियों की निगरानी में रखा जाएगा। इसके अलावा, समिति के सभी कर्मचारियों के कामकाज के तरीके की गहन समीक्षा की जा रही है। आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं, क्योंकि जांच का दायरा अब उन बड़े चेहरों तक पहुंच रहा है, जो इस पूरे घोटाले को पर्दे के पीछे से संचालित कर रहे थे।

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