पहले बरसाईं मिसाइलें, फिर कर दी तारीफ; आखिर क्यों ‘हार’ की बात कहकर ट्रंप ने ईरान पर लुटाया प्यार?
वॉशिंगटन/तेहरान: मिडिल ईस्ट के रणमैदान से एक ऐसी खबर आ रही है जिसने दुनिया भर के सैन्य और राजनीतिक विशेषज्ञों के सिर चकरा दिए हैं। एक तरफ जहां अमेरिकी मिसाइलें ईरान के सीने को छलनी कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बेहद चौंकाने वाला बयान सामने आया है। ईरान पर 500 से ज्यादा मिसाइलें दागने के ठीक बाद, ट्रंप ने न सिर्फ ईरान की तारीफ की है, बल्कि एक अनोखे संदर्भ में 'हार' की बात स्वीकार करते हुए तेहरान पर जमकर प्यार लुटाया है। आखिर इस भीषण युद्ध के बीच ट्रंप के इस यू-टर्न का असली गेम प्लान क्या है?
मिसाइल अटैक के बाद अचानक बदला ट्रंप का सुर
आमतौर पर अपने आक्रामक तेवरों के लिए जाने जाने वाले डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर चौतरफा सैन्य कार्रवाई के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ ऐसा कहा जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। ट्रंप ने ईरान के पलटवार और उनकी युद्ध रणनीति की सराहना करते हुए उन्हें 'अविश्वसनीय रूप से स्मार्ट और मजबूत दुश्मन' बता दिया। जहां एक तरफ पेंटागन ईरान को घुटनों पर लाने का दावा कर रहा था, वहीं देश के कमांडर-इन-चीफ का यह बयान हर किसी को हैरान कर गया।
'हार' का जिक्र और ईरान की तारीफ के पीछे का सच
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि पारंपरिक युद्ध में अमेरिका का कोई सानी नहीं है, लेकिन ईरान ने जिस तरह से अपने बेहद सस्ते, 'लो-कॉस्ट' आत्मघाती ड्रोनों से अमेरिकी डिफेंस सिस्टम को उलझाया है, उसने अमेरिका को तकनीक और लागत (Cost-Effectiveness) के मोर्चे पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। ट्रंप का इशारा इसी बात की तरफ था कि लाखों डॉलर की पैट्रियट मिसाइलों से कुछ हजार डॉलर के ड्रोन गिराना आर्थिक रूप से एक तरह की 'हार' ही है। उन्होंने माना कि ईरान ने बहुत ही चालाकी से अमेरिकी सेना को छकाया है।
क्या यह किसी बड़े समझौते की तैयारी है?
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान महज एक तारीफ नहीं, बल्कि एक सोची-समझी कूटनीति का हिस्सा है। ट्रंप हमेशा से खुद को एक 'डील मेकर' (Deal Maker) के रूप में पेश करते आए हैं। दुश्मन को ताकत दिखाने के बाद उसकी तारीफ करना और फिर उसे बातचीत की मेज पर लाना ट्रंप की पुरानी रणनीति रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप ईरान को यह संदेश दे रहे हैं कि वे ईरान की ताकत का सम्मान करते हैं, और अगर ईरान चाहे तो अब सम्मानजनक तरीके से युद्धविराम (Ceasefire) और नई न्यूक्लियर डील के लिए आगे आ सकता है।