'कुत्ते का मांस खाओ'...उत्तर कोरिया का अनोखा फरमान, जनता को क्यों दी गई यह अजीबोगरीब सलाह?

'कुत्ते का मांस खाओ'...उत्तर कोरिया का अनोखा फरमान, जनता को क्यों दी गई यह अजीबोगरीब सलाह?

अपने अजीबोगरीब और तुगलकी फरमानों के लिए हमेशा सुर्खियों में रहने वाले उत्तर कोरिया (North Korea) से एक बार फिर हैरान करने वाली खबर सामने आई है। तानाशाह किम जोंग उन के शासन वाले इस देश में जनता को जिंदा रहने और पेट भरने के लिए 'कुत्ते का मांस खाने' की अजीबोगरीब सलाह दी गई है। गंभीर आर्थिक संकट, भुखमरी और भारी खाद्य संकट से जूझ रहे उत्तर कोरियाई प्रशासन ने नागरिकों से कहा है कि वे अपनी पारंपरिक संस्कृति और सेहत का हवाला देते हुए कुत्ते के मांस का सेवन बढ़ाएं। इस नए फरमान के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है।

गंभीर खाद्य संकट और भुखमरी के दौर से गुजर रहा देश

विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, उत्तर कोरिया इन दिनों अपनी सबसे भीषण आर्थिक और खाद्यान्न कमी (Food Shortage) का सामना कर रहा है। खराब नीतियां, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और प्राकृतिक आपदाओं के चलते देश में अनाज की भारी किल्लत हो गई है। आम जनता को दो वक्त की रोटी के लाले पड़े हैं और कुपोषण चरम पर है। ऐसे में देश के तानाशाही प्रशासन ने पारंपरिक भोजन के नाम पर लोगों को कुत्ते का मांस खाने का खुला सुझाव दिया है, ताकि बढ़ते खाद्य संकट से किसी तरह निपटा जा सके।

कुत्ते के मांस को माना जाता है 'स्वास्थ्यवर्धक' टॉनिक

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया की पुरानी संस्कृति में कुत्ते के मांस को शरीर को गर्म रखने और ताकत देने वाला पौष्टिक आहार माना जाता है। उत्तर कोरियाई मीडिया और प्रशासनिक प्रचार तंत्र के जरिए जनता को यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि गर्मी के मौसम में स्टेमिना बनाए रखने और कुपोषण से लड़ने के लिए 'डैंगोगी' (Dangogi - कुत्ते के मांस से बना सूप या व्यंजन) बेहद फायदेमंद है। प्रशासन इसे एक पारंपरिक स्वास्थ्य वर्धक उपाय के रूप में परोस रहा है, जबकि असलियत यह है कि देश में चिकन, मटन या अन्य मीट की कीमतें आसमान छू रही हैं और आम आदमी की पहुंच से बाहर हैं।

पशु प्रेमियों और मानवाधिकार संगठनों में भारी रोष

उत्तर कोरिया के इस अजीबोगरीब और क्रूर फरमान की दुनियाभर में कड़ी निंदा हो रही है। पशु अधिकार संगठनों (Animal Rights Organizations) ने इस पर गहरी आपत्ति जताई है। हालांकि, दुनिया के कई एशियाई देशों में कुत्ते का मांस खाया जाता है, लेकिन एक देश की सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर नागरिकों को भुखमरी मिटाने के लिए यह विकल्प अपनाने की सलाह देना वहां के मानवीय संकट की पोल खोलता है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उत्तर कोरिया के आम नागरिकों को बुनियादी मानवाधिकार और भरपेट भोजन पाने के लिए भी किन अमानवीय हालातों से गुजरना पड़ रहा है।

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