इंकलाब जिंदाबाद, हमारा अरमान भगत सिंह के सपनों का हिंदुस्तान: कन्हैया कुमार

जिनका विचार भगत सिंह के विचारों से ठीक उल्टा है वो भी इनको अपना आदर्श मानते हैं। कई लोग भगत सिंह के योगदान को बम-पिस्तौल, सोंडर्स की हत्या, जेल और फांसी से ज्यादा नहीं समझते।

बेगूसराय।। जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष और कम्युनिस्ट नेता डॉ. कन्हैया कुमार ने सोमवार को सरदार भगत सिंह की जयंती के मौके पर एक बार फिर से सरकार पर निशाना साधा है। कन्हैया ने कहा है कि आज पूरा देश शहीद ए आजम भगत सिंह की जयंती मना रहा है।

जिनका विचार भगत सिंह के विचारों से ठीक उल्टा है वो भी इनको अपना आदर्श मानते हैं। कई लोग भगत सिंह के योगदान को बम-पिस्तौल, सोंडर्स की हत्या, जेल और फांसी से ज्यादा नहीं समझते। असल में भगत सिंह की वैचारिकी बिल्कुल साफ और स्पष्ट थी, वो कहते थे बम और पिस्तौल कभी इंकलाब नहीं ला सकते।

उनके इंकलाब की समझ के अनुसार जब तक किसी एक मनुष्य का किसी दूसरे मनुष्य द्वारा शोषण हो रहा हो तब तक इंकलाब की लड़ाई बाकी है। उनकी आजादी का मतलब सिर्फ अंग्रेजों को देश से भगा देने भर तक सीमित नहीं था वो व्यवस्था परिवर्तन की बात करते थे। जान बूझकर भगत सिंह को हिंसा की बहस तक समेटने की साजिश की गई, ताकि भगत सिंह को गांधी के विरुद्ध खड़ा किया जा सके।

जबकि भगत सिंह कहते थे कि अगर जेल से निकल पाया तो देश की स्वतंत्रता के लिए और व्यवस्था परिवर्तन के लिए जन-आंदोलन में शामिल होऊंगा। भगत सिंह के जिन साथियों को फांसी नहीं हुई उनमें से ज्यादातर लोग उस वक्त की कॉम्युनिस्ट पार्टी में शामिल भी हुए।

शुरू से ही भगत सिंह पर समाजवादी और साम्यवादी विचारधारा का गहरा प्रभाव था। जब उनको फांसी पर चढ़ाने के लिए सिपाही लेने आए तो उन्होंने कहा ‘थोड़ा ठहर जाओ एक क्रांतिकारी दुसरे क्रांतिकारी से मिल रहा हैI’ उस वक्त वो लेनिन की किताब ‘राज्य और क्रांति’ पढ़ रहे थे। भगत सिंह की जेल डायरी को हर किसी को पढ़ना चाहिए, ताकि इस महान योद्धा को समग्रता में समझा जा सके। वो समझ सकें कि आज अगर भगत सिंह होते तो किसानों के फसल के दाम के लिए, बेरोजगारों के काम के लिए, हर आवाम के लिए इस बेरहम सत्ता के सामने सर उठा कर लड़ रहे होते।

कन्हैया ने कहा कि सत्ता के सामने झुक जाना, समझौता कर लेना, माफी मांग लेना, ये भगत सिंह होने के विरुद्ध है। इसलिए न्याय के लिए, बराबरी के लिए अपनी आवाज बुलंद करना, किसानों के पक्ष में खड़ा होना, सबके रोजगार के लिए लड़ना, किसी भी शोषण और अन्याय का डट कर मुक़ाबला करना ही शहीद ए आजम भगत सिंह को सही मायनों में याद करना है। दरअसल भगत सिंह आज भी जनता के संघर्षों में जिंदा हैं, इसलिए इंकलाब जिंदाबाद।

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