Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर दुनिया भर के सामरिक विशेषज्ञों की नजरें टिकी हैं। शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और व्हाइट हाउस के पूर्व सलाहकार रॉबर्ट पेप ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर एक चौंकाने वाली चेतावनी जारी की है। पेप के अनुसार, ट्रंप इस समय एक ऐसे 'डेन्जरस ट्रैप' (खतरनाक जाल) में फंस चुके हैं, जहां से निकलना उनके लिए आसान नहीं होगा। उन्होंने साफ किया है कि ट्रंप की हालिया 'शांति वार्ता' की कोशिशें केवल समय काटने की रणनीति हो सकती हैं, जबकि असल तैयारी कुछ और ही है।
क्या 'समय खरीदने' के लिए ट्रंप ने टाला हमला?
प्रोफेसर पेप ने एनडीटीवी की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि ट्रंप द्वारा हमलों पर 5 दिन का विराम लगाना दरअसल 'टाइम बाइंग टैक्टिक' है। पेप के मुताबिक, ट्रंप पिछले 10 दिनों से अमेरिकी मरीन सैनिकों के पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "मैं नेताओं के बयानों पर नहीं, उनके व्यवहार पर भरोसा करता हूं। ट्रंप ने अभी तक मरीन सैनिकों को ले जा रहे जहाजों को वापस लौटने का आदेश नहीं दिया है। जब तक जहाज समुद्र से वापस नहीं लौटते, तब तक युद्ध टलने की बात करना बेमानी है।"
मरीन सैनिकों की मौजूदगी और होर्मुज पर ईरान का 'कब्जा'
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही अमेरिकी मरीन सैनिक युद्ध क्षेत्र में कदम रखेंगे, स्थिति पूरी तरह बदल जाएगी। वर्तमान में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ईरान का कड़ा नियंत्रण है। अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो:
तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी होगी।
वैश्विक स्तर पर बड़ी कंपनियां आर्थिक मंदी (Recession) की आशंका जताने लगेंगी।
सप्लाई चेन पूरी तरह ठप होने का खतरा बढ़ जाएगा।
क्या है 'एस्केलेशन ट्रैप' (तनाव बढ़ाने का जाल)?
प्रोफेसर पेप ने समझाया कि जब किसी शक्तिशाली देश की रणनीतियां—जैसे बमबारी या नेताओं की हत्या—काम नहीं करतीं, तो वह 'एस्केलेशन ट्रैप' में फंस जाता है। ट्रंप चाहते थे कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम बंद कर दे और वहां सत्ता परिवर्तन हो, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब रणनीतिक लक्ष्य विफल होते हैं, तो और बड़ी सैन्य कार्रवाई करने का दबाव बढ़ता है। यही वह चक्र है जिसमें अमेरिका फंसता दिख रहा है और फिलहाल स्थिति पूरी तरह ईरान के पक्ष में नजर आ रही है।
समाधान का एकमात्र रास्ता: इजरायल पर सैन्य नियंत्रण
पेप ने एक बेहद कड़ा तर्क देते हुए कहा कि इस स्थिति को सामान्य करने का एकमात्र तरीका इजरायल को सैन्य रूप से नियंत्रित करना है। उन्होंने कहा, “जैसे निक्सन ही चीन जा सकते थे, वैसे ही केवल ट्रंप ही इजरायल और नेतन्याहू पर लगाम लगा सकते हैं। इजरायल ने बार-बार वादे तोड़े हैं और वार्ताकारों की हत्या की है, इसलिए केवल वादों से काम नहीं चलेगा। जब तक अमेरिका इजरायल की आक्रामक नीति को प्रभावी ढंग से नहीं रोकता, तब तक शांति की कोई भी उम्मीद बेमानी है।”




