RIMS-2 पर हेमंत सोरेन का फैसला: कांग्रेस नेता के तीखे तेवर, कहा- 'शिबू सोरेन के बेटे हैं, उन्हें इतिहास नहीं भूलना चाहिए'

RIMS-2 पर हेमंत सोरेन का फैसला: कांग्रेस नेता के तीखे तेवर, कहा- 'शिबू सोरेन के बेटे हैं, उन्हें इतिहास नहीं भूलना चाहिए'

झारखंड की राजनीति में RIMS-2 (राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के विस्तार) को लेकर चल रहा विवाद अब गरमाता जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस महत्वाकांक्षी फैसले पर उनकी ही गठबंधन सहयोगी पार्टी के एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने खुलकर सवाल उठाए हैं। नेता ने सीएम के फैसलों पर आपत्ति जताते हुए सीधे तौर पर कहा है कि, "हेमंत सोरेन को यह नहीं भूलना चाहिए कि वे शिबू सोरेन के बेटे हैं।" इस बयान के बाद झारखंड की गठबंधन सरकार में आंतरिक मतभेद की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

कांग्रेस नेता का क्यों है विरोध?

कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया है कि RIMS-2 के लिए जिस तरह से जमीन और संसाधनों का चयन किया गया है, वह स्थानीय हितों के खिलाफ जा सकता है। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन (गुरुजी) ने हमेशा जल, जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ी है, और आज उनके ही बेटे की सरकार में लिए गए फैसले उस विरासत से दूर होते नजर आ रहे हैं। कांग्रेस नेता का तर्क है कि सरकार को किसी भी बड़े प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले गठबंधन के साथियों और स्थानीय समुदायों को भरोसे में लेना चाहिए था। इस बयान को सरकार के भीतर एक 'चेतावनी' के तौर पर देखा जा रहा है।

क्या गठबंधन में बढ़ रही है खटास?

हेमंत सोरेन सरकार के इस फैसले ने विपक्ष को भी हमलावर होने का मौका दे दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 'शिबू सोरेन के बेटे' वाली टिप्पणी यह दर्शाती है कि कांग्रेस पार्टी सरकार के काम करने के तरीके से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। हालांकि, झामुमो (JMM) की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन कांग्रेस के इस रुख ने सत्ता के गलियारों में खलबली मचा दी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मुख्यमंत्री सोरेन इन आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए प्रोजेक्ट में कोई बदलाव करेंगे या फिर गठबंधन की यह तनातनी और आगे बढ़ेगी।

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