तानों को बनाया कामयाबी की सीढ़ी: मोतिहारी की स्नेहा ने बिना कोचिंग, पहले ही प्रयास में क्रैक की BPSC परीक्षा!
कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और खुद पर भरोसा हो, तो दुनिया की कोई भी रुकावट आपका रास्ता नहीं रोक सकती। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) की रहने वाली स्नेहा सिंह ने। स्नेहा ने सीमित संसाधनों और समाज के पारंपरिक तानों को अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदल दिया। उन्होंने बिना किसी बड़े शहर (जैसे पटना या दिल्ली) में जाकर महंगी कोचिंग किए, घर पर रहकर ही दिन-रात एक किया और अपने पहले ही प्रयास में प्रतिष्ठित बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर ली।
रूढ़िवादी सोच को दिया करारा जवाब: जब तानों को ही बना लिया हथियार
स्नेहा की यह राह इतनी आसान नहीं थी। एक छोटे शहर और मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने के कारण उन्हें भी समाज के उस पारंपरिक दबाव का सामना करना पड़ा, जहां बेटियों की उच्च शिक्षा से ज्यादा उनकी शादी को तवज्जो दी जाती है। पड़ोसियों और रिश्तेदारों के "लड़की है, ज्यादा पढ़ाकर क्या होगा" जैसे तानों ने उनके हौसले को तोड़ने की बजाय और मजबूत कर दिया। स्नेहा ने तय कर लिया था कि वह इन तानों का जवाब अपनी जुबान से नहीं, बल्कि अपनी बड़ी सफलता से देंगी।
बिना किसी महंगी कोचिंग के सफलता: सेल्फ स्टडी और इंटरनेट का सही इस्तेमाल
आज के दौर में जहां BPSC और UPSC जैसी परीक्षाओं के लिए लाखों रुपये की कोचिंग को जरूरी माना जाता है, वहीं स्नेहा ने इस धारणा को पूरी तरह से बदल दिया। उन्होंने किसी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया। स्नेहा बताती हैं कि उन्होंने परीक्षा के सिलेबस को अच्छी तरह समझा, मानक किताबों (Standard Books) को अपना आधार बनाया और इंटरनेट व यूट्यूब (YouTube) का इस्तेमाल केवल अपने डाउट्स को क्लियर करने के लिए किया। नियमित रूप से 8 से 10 घंटे की कड़ी सेल्फ स्टडी (Self Study) और खुद पर अटूट विश्वास ही उनकी इस ऐतिहासिक सफलता का मूल मंत्र बना।
परिवार में जश्न का माहौल: माता-पिता की आंखों में झलके खुशी के आंसू
जैसे ही BPSC का फाइनल रिजल्ट घोषित हुआ और स्नेहा के रोल नंबर के आगे सफलता की मुहर लगी, पूरे मोतिहारी जिले में उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। बेटी की इस अभूतपूर्व कामयाबी पर माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। स्नेहा की मां ने गर्व से कहा कि उनकी बेटी ने न सिर्फ पूरे परिवार का नाम रोशन किया है, बल्कि उन सभी लोगों को चुप करा दिया है जो बेटियों को बोझ समझते थे। स्नेहा अब प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज के वंचित तबके और विशेषकर महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम करना चाहती हैं।