पत्रकार अमीष देवगन को ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती केस में सुप्रीम कोर्ट से राहत!

SC ने पत्रकार अमीष देवगन की सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के विरूद्ध अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने के मामले में दर्ज FIR निरस्त करने से इनकार कर दिया है।

उच्चतम न्यायालय (SC) ने पत्रकार अमीष देवगन की सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के विरूद्ध अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने के मामले में दर्ज FIR निरस्त करने से इनकार कर दिया है। हालांकि अदालत ने अमीष देवगन की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने देवगन के विरूद्ध दर्ज सभी FIR को अजमेर ट्रांसफर करने का आदेश दिया है।

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बीते 25 सितम्बर को जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। पिछले 26 जून को अदालत ने नोटिस जारी करते हुए देवगन की गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। अदालत ने देवगन के वकील सिद्धार्थ लूथरा को निर्देश दिया था कि वो इस मामले में FIR के सभी शिकायतकर्ताओं को पक्षकार बनाएं।

लूथरा ने अदालत में कहा था कि देवगन से अनजाने में गलती हो गई है, जिसके लिए उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। उन्होंने कहा था कि अमीष देवगन के विरूद्ध राजस्थान, महाराष्ट्र और तेलंगाना में कई FIR दर्ज की गई हैं। देवगन के परिवार वालों को भी धमकी दी जा रही है। महाराष्ट्र में दर्ज FIR के दो शिकायतकर्ताओं की ओर से वकील रिजवान मर्चेंट ने कहा था कि देवगन ने अपने प्रोग्राम में कई बार लुटेरे चिश्ती शब्द का प्रयोग किया।

अमीष देवगन ने अपने 15 जून के टीवी शो में लुटेरे चिश्ती के नाम से एक कार्यक्रम प्रसारित किया था। उस कार्यक्रम से मुस्लिम समुदाय के लोग बहुत ठेस पहुंची थी। उस शो में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती को आक्रामक और लुटेरा कहा गया था। इस शो के विरूद्ध मुंबई में रजा एकेडमी नामक संस्था ने देवगन के विरूद्ध FIR दर्ज कराई थी। मुंबई के अलावा नांदेड़ पुलिस ने भी देवगन के विरूद्ध FIR दर्ज की हुई है।

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