प्रतापगढ़ में पत्रकार की मौत, आला पुलिस अफसर से लगाईं थी जान की गुहार

माफिया-पुलिस गठजोड़ का शिकार हुआ पत्रकार! विपक्ष ने योगी सरकार को घेरा

प्रतापगढ़। जनपद में अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। नशा के कारोबारियों के आगे पुलिस-प्रशासन नतमस्तक है। अगर किसी ने इस सिंडिकेट के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत की तो उसकी लाश लावारिस अवस्था मे सड़क पर मिली। ज़िले के पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव के साथ भी ऐसा ही हुआ। बीती रात वह एक ईंट भट्ठे के पास घायल अवस्था में मिले, कुछ देर बाद जिला अस्पताल में उनकी मौत हो गई। पत्रकार की मौत को लेकर कांग्रेस और आप ने योगी सरकार पर निशाना साधा है।

जानकारी के मुताबिक़ पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव पिछले कई महीने से जिले में शराब माफिया और अवैध व प्रतिबंधित दवाओं के कारोबारियों के कारनामे उजागर कर रहे थे, जिससे शराब माफियाओं में इन को लेकर काफी बौखलाहट थी। पत्रकार ने समय रहते अपनी जान को संभावित खतरे से एडीजी जोन को भी अवगत करा दिया था। इसके बावजूद पत्रकार की सुरक्षा के बारे में पुलिस को कोई परवाह नहीं थी। हालांकि पुलिस इसे प्रथम दृष्टया दुर्घटना बता रही है।

प्रतापगढ़ में पत्रकार की मौत को लेकर राजनीतिक दलों ने योगी सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सुलभ श्रीवास्तव की मौत को लेकर योगी सरकार से जवाब मांगा है। प्रियंका गांधी ने सवाल किया है कि जंगलराज को पालने-पोसने वाली यूपी सरकार के पास पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव जी के परिजनों के आंसुओं का कोई जवाब है?

इसी तरह आप सांसद संजय सिंह ने पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव की मौत को हत्या क़रार दिया है। संजय सिंह ने कहा कि शराब माफ़ियाओं के ख़िलाफ़ ख़बर चलाने के कारण यूपी में एक पत्रकार की हत्या हो जाती है जबकि एक दिन पहले सुलभ जी ने एडीजी को पत्र लिखकर हत्या की आशंका जताई थी, लेकिन सब सोते रहे।

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