जाने क्यों खास है कानपुर का हर्बल गुलाल, क्या है इसकी विशेषता और भाव

हटिया बाजार स्तिथ छन्नू लाल रंग वाले पिछले 75 वर्षों से रंगों के व्यापार से कनपुरियों को रंग व अबीर-गुलाल से सराबोर करने का काम कर रहे हैं।

कानपुर।। होली का त्योहार एक भाईचारे से जुड़ा पर्व है। जिसमें हर कोई भेदभाव भूलकर रंगों के साथ इस पर्व को मनाता है। रंगों के इस त्योहार में कानपुर का हर्बल रंग व गुलाल बाजार में और भी खिल रहा है। साथ ही कोरोना के संक्रमण पर भी यह भारी पड़ रहा है। पानी वाले रंग की अपेक्षा सूखे व हर्बल गुलाल की मांग इस होली के त्योहार पर खासी बढ़ी है।

हटिया बाजार स्तिथ छन्नू लाल रंग वाले पिछले 75 वर्षों से रंगों के व्यापार से कनपुरियों को रंग व अबीर-गुलाल से सराबोर करने का काम कर रहे हैं। छन्नू लाल रंग वालों की दूसरी पीढ़ी के विनोद सेठ ने बताया कि आज से कई वर्ष पूर्व हमारे पिता ने रंग का व्यापार शुरू किया था, जिसे हम आज भी कायम रख रहे हैं।

बताया कि हमारे यहां केमिकल युक्त रंगों व गुलाल को ग्राहकों की सेहत को ध्यान में रखते हुए कभी भी प्रयोग नहीं किया जाता है और न ही बेचा जाता है। साल-दर-साल हमने रंगों के त्योहार को सेहत के अनुकूल बनाने के लिए हर्बल विधि से तैयार रंगों व गुलाल तैयार किया जाता है। यह सेहत व चेहरे को नुसान भी नहीं पहुंचाता है और सुगंधित भी होता है। साथ ही कोरोना जैसी महामारी में संक्रमण से भी काफी हद तक रोकथाम में कारगर है।

उन्होंने बताया कि जब से कोरोना का संक्रमण फैला है। तब से पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष रंग के प्रेमियों में भारी गिरावट आई हैं। अबकी बार तो सिर्फ 50 फीसदी ही रंग खरीदार ही बाजार में आ रहे। हमारे यहां के रंग प्रेमी आधी यूपी से आते थे लेकिन कोविड-19 में यातायात सम्बंधित दिक्कतों की वजह से भी हमारे यहां ग्राहकों के आने में कमी आई है।

छन्नू लाल रंग वालों की चौथी पीढ़ी के सदस्य मगन सेठ भी रंगों के त्योहार होली को रंगीन बानने के कार्य को बखूबी निभा रहे है। उनका कहना है कि कोरोना महामारी के दौर में हम ग्राहकों की सुविधाओं को देखते हुए साफ व सुथरे ढंग से रंगों को बनवा रहे हैं। जिससे रंग के इस्तेमाल में उनको किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो।

ग्राहक जय जैन का कहना है कि छन्नू लाल रंग वालों के नाम से ही शुद्धता की पहचान बनी हुई है। हमारे परिवार में भी दो पीढ़ियों से इनकी दुकान का ही रंग इस्तेमाल किया जा रहा है। इनके रंगों में विशेष गुलाल होता है जो पूरी तरह हर्बल तकनीकी से तैयार किया जाता है। यह चेहरे को भी नुकसान नहीं पहुंचाता है।

यह हैं हर्बल रंगों व गुलाल के दाम–

इस बार हमारे रंगों का मूल्य भी अलग तय किया गया है। यह गुलाल 50 से 200 रुपये तक, हर्बल गुलाल 500 रुपये किलो, रंग दो हजार रुपये किलो, हल्की गुणवत्ता का 400 से 500 रुपये तक, रंग स्प्रे 60 से 120 रुपये तक व फॉग धुंआ 150 रुपये में पांच पीस मिलेंगे। वहीं पानी वाले रंगों से होली खेलने वालों के लिए एक विशेष प्रकार का मोबाइल कवर भी बेचा जा रहा है। जिसकी कीमत मात्र 60 रुपये तय की है।

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