Corona संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच प्रवासी कामगारों का पलायन, यूपी में सख्त गाइडलाइन जारी

उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) ने प्रदेश में प्रवासी कामगारों की वापसी पर उन्हें क्वारंटाइन करने को लेकर गाइडलाइन जारी की है।

Lucknow । Corona virus की दूसरी लहर से पूरा देश आक्रांत है। कई राज्‍यों में लॉकडाउन(Lockdown) और नाइट कर्फ्यू (Night curfew) लगा है। लखनऊ समेत पुरे यूपी की हालत चिंताजनक बनी हुई है। देशव्यापी लॉकडाउन की आहट के साथ ही एक बार फिर विभिन्‍न राज्‍यों से प्रवासी कामगारों का अपने-अपने घरों के लिए पलायन शुरू हो गया है। बड़ी तादाद में प्रवासी कामगारों की घर वापसी के बीच उत्‍तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रवासी कामगारों के लिए सख्त गाइडलाइन जारी की है।

उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) ने प्रदेश में प्रवासी कामगारों की वापसी पर उन्हें क्वारंटाइन करने को लेकर गाइडलाइन जारी की है। नई गाइडलाइन के अनुसार लक्षण वाले जो व्यक्ति संक्रमित नहीं पाए जाते उन्हें 14 दिन और बिना लक्षण वाले लोगों को 7 दिन के लिए होम क्वारंटाइन में भेजा जाएगा। गाइडलाइन के अनुसार प्रवासी कामगारों के अपने जिले में पहुंचने पर जिला प्रशासन को उसकी स्‍क्रीनिंग के साथ ही उसका नाम, पता और मोबाइल नंबर समेत अहम जानकारियों की सूची भी तैयार करेगा।

इस समय भारत में कोविड-19 की तस्बीर भयानक है। पिछले चौबीस घंटे में रिकॉर्ड दो लाख से अधिक मामले सामने आने के बाद आम लोगों में भी स्वाभाविक है। महाराष्‍ट्र, गुजरात, पंजाब और उत्तर प्रदेश की हालत बद से बदतर हो चुकी है। लखनऊ में शवों के अंतिम संस्कार के लिए 12 -12 घंटे प्रतीक्षा करनी पद रही है।

यूपी में 24 घंटों में 20,510 नए कोरोना संक्रमित मामले सामने आए हैं। गत मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में कोरोना संक्रमण से अधिक प्रभावित शहरों में राज्य सरकार को दो या तीन हफ्ते के लिए पूर्ण लाॅकडाउन लगाने पर विचार करने का निर्देश दिया था।

इस बीच महाराष्‍ट्र, गुजरात, हरियाणा, राजस्‍थान और दिल्ली समेत कई राज्‍यों से बड़ी तादाद में प्रवासी कामगार रेलों व बसों से अपने-अपने घरों की ओर चल पड़े हैं। इसमें यूपी और बिहार के प्रवासी कामगारों की तादाद ज्यादा है। तमाम लोग दोगुना और तीन गुना अधिक किराया देकर घरों को लौट रहे हैं। ये प्रवासी कामगार पिछले साल की दुश्वारियों को अभी भूले नहीं हैं, जब लाखों प्रवासी कामगारों को बेसहारा छोड़ दिया गया था।

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