पाकिस्तानी सेना पर हमला या खुद की रची साजिश? रावलकोट में लश्कर-ए-तैयबा के 'फॉल्स फ्लैग' अटैक का सनसनीखेज सच आया सामने!
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के रावलकोट इलाके से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने रक्षा विशेषज्ञों और खुफिया एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। रावलकोट में पाकिस्तानी सेना के काफिले और ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए एक कथित आतंकी हमले को लेकर अब बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया जा रहा है। रक्षा रणनीतिकारों और खुफिया सूत्रों का मानना है कि यह कोई सामान्य आतंकी हमला नहीं था, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत को बदनाम करने के लिए लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) द्वारा मिलकर रचा गया एक 'फॉल्स फ्लैग' (False Flag) ऑपरेशन था।
क्या होता है 'फॉल्स फ्लैग' ऑपरेशन और रावलकोट में क्या हुआ?
आसान शब्दों में कहें तो 'फॉल्स फ्लैग' एक ऐसी सैन्य या खुफिया साजिश होती है, जिसमें कोई देश या संगठन खुद ही अपने लोगों या संपत्तियों पर हमला करवाता है, लेकिन इसका आरोप अपने दुश्मन देश पर मढ़ देता है।
रावलकोट में हुए इस कथित हमले के तुरंत बाद पाकिस्तानी मीडिया और वहां के सोशल मीडिया हैंडल्स ने बिना किसी जांच के इसका सीधा संबंध भारतीय एजेंसियों से जोड़ने की कोशिश शुरू कर दी। लेकिन इस जल्दबाजी ने ही पाकिस्तानी सेना की पोल खोल दी। खुफिया विश्लेषकों का कहना है कि हमले की टाइमिंग और उसके तुरंत बाद शुरू हुआ प्रोपेगैंडा इस बात का पुख्ता सबूत है कि इस पूरी पटकथा को रावलपिंडी (पाकिस्तानी सेना मुख्यालय) में ही तैयार किया गया था।
लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों का इस्तेमाल और आईएसआई का हाथ
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरी साजिश को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को सौंपी गई थी। लश्कर के स्थानीय गुर्गों ने रावलकोट के बाहरी इलाके में सुरक्षाबलों पर दिखावटी गोलाबारी और धमाके किए।
इस ड्रामे का मकसद दुनिया को यह दिखाना था कि कश्मीर के इस हिस्से में भारी अस्थिरता है और इसके पीछे बाहरी ताकतों का हाथ है। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि पीओके (PoK) की स्थानीय जनता लगातार बुनियादी सुविधाओं और मानवाधिकारों को लेकर पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन कर रही है। इस जन-आक्रोश से दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए भी इस फर्जी हमले की स्क्रिप्ट लिखी गई।
बेनकाब हुआ पाकिस्तान का दोहरा चेहरा
रावलकोट के इस घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की पाबंदियों और वैश्विक दबाव के बावजूद पाकिस्तान की जमीन पर पल रहे आतंकी संगठन और वहां की सेना आज भी एक सिक्के के दो पहलू हैं। अपनी नाकामी छुपाने और भारत के खिलाफ झूठा नैरेटिव सेट करने के लिए पाकिस्तानी सेना अपने ही जवानों की जान दांव पर लगाने से भी गुरेज नहीं कर रही है। इस खुलासे के बाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की साख को एक और बड़ा झटका लगा है।