Copper Price Hike: घर बनाने से लेकर गाड़ी और बिजली के सामान तक सब कुछ होने वाला है भयानक महंगा

Copper Price Hike: घर बनाने से लेकर गाड़ी और बिजली के सामान तक सब कुछ होने वाला है भयानक महंगा

वैश्विक अर्थव्यवस्था और कमोडिटी मार्केट में इन दिनों एक ऐसी बड़ी भूचाल लाने वाली खबर सामने आई है जिसने भारत समेत दुनिया भर के उद्योग जगत, रियल एस्टेट सेक्टर और आम आदमी की नींद उड़ाकर रख दी है। आधुनिक औद्योगिक विकास, निर्माण कार्य, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की रीढ़ माने जाने वाले तांबे यानी कॉपर की कीमतों में आने वाले दिनों में भारी उछाल आने की पूरी संभावना बन गई है, जिसके कारण घर बनाने से लेकर कार खरीदने और बिजली के घरेलू सामान तक सब कुछ अचानक महंगा होने जा रहा है। अमेरिका की सत्ता संभालने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लिए गए एक आक्रामक और दूरगामी आर्थिक फैसले ने वैश्विक व्यापार नीति और धातुओं के बाजार में ऐसा जबरदस्त बवाल काट दिया है कि दुनिया भर के मेटल मार्केट में हड़कंप मच गया है। इस भू-राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल के बीच भारत जैसे विकासशील देश के आम उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर पड़ने वाला है, क्योंकि कॉपर एक ऐसी कच्ची धातु है जिसके बिना किसी भी आधुनिक अर्थव्यवस्था का पहिया आगे नहीं बढ़ सकता है। इस विस्तृत और खास लेख के माध्यम से आइए जानते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप का वह फैसला क्या है, क्यों कॉपर के दाम आसमान छूने वाले हैं और इसका आपकी जेब पर क्या सीधा असर पड़ेगा।

डोनाल्ड ट्रंप का वह कड़ा आर्थिक फैसला जिसने कॉपर मार्केट में मचा दी है भारी हलचल और खलबली

वैश्विक व्यापार और टैरिफ नीतियों को लेकर हमेशा से अपनी आक्रामक शैली के लिए जाने जाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में आयातित धातुओं और कच्चे माल पर भारी-भरकम आयात शुल्क (Tariff) लगाने का एक कड़ा निर्णय लिया है। अमेरिका की घरेलू विनिर्माण इंडस्ट्री को बढ़ावा देने और चीन जैसे व्यापारिक प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी टक्कर देने के उद्देश्य से लिए गए इस फैसले के तहत तांबे और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के आयात पर कड़े प्रतिबंध व टैक्स जोड़े गए हैं। इस फैसले के सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजार और लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर कॉपर के वायदा भाव में जबरदस्त तेजी देखने को मिली, क्योंकि निवेशकों और व्यापारियों को यह अंदेशा हो गया है कि आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर तांबे की भारी किल्लत पैदा हो सकती है। जब दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक द्वारा इस प्रकार के सख्त संरक्षणवादी कदम उठाए जाते हैं, तो पूरी ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित होती है और उसका सीधा खामियाजा उन देशों को भुगतना पड़ता है जो कच्चे माल के आयात पर निर्भर रहते हैं।

रियल एस्टेट और घर बनाने का सपना देख रहे मध्यम वर्ग को लगेगा बड़ा झटका, सरिया और सीमेंट के बाद अब कॉपर हुआ लाल

भारत जैसे विकासशील देश में अपने सपनों का एक छोटा सा आशियाना या मकान बनाना हर मध्यमवर्गीय परिवार का सबसे बड़ा लक्ष्य होता है, जिसके लिए लोग अपनी पाई-पाई जोड़कर बजट तैयार करते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से निर्माण सामग्री जैसे सीमेंट, स्टील, सरिया, और ईंटों के दाम बढ़ने के कारण घर बनाना पहले ही काफी महंगा हो चुका था, और अब कॉपर के दामों में आने वाले इस भूचाल ने आग में घी डालने का काम किया है। मकान के निर्माण के दौरान दीवारों की वायरिंग, अर्थिंग, प्लंबिंग फिटिंग, एसी और अन्य इलेक्ट्रिक इंस्टॉलेशन में शुद्ध तांबे के तारों और पाइपों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है, जिसके बिना घर का काम पूरा नहीं हो सकता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉपर महंगा होगा, तो भारतीय बाजार में भी तांबे से बने सभी उत्पादों के दाम सीधे तौर पर बढ़ जाएंगे, जिससे घर की कुल निर्माण लागत में एकमुश्त भारी इजाफा होना तय माना जा रहा है।

ऑटोमोबाइल सेक्टर से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स और बिजली के सामान तक सब कुछ खरीदने के लिए चुकानी होगी अधिक कीमत

केवल रियल एस्टेट ही नहीं बल्कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार पर भी इस फैसले का बहुत गहरा और नकारात्मक प्रभाव पड़ने वाला है। आधुनिक कारों, मोटरसाइकिलों और विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के मोटर, वायरिंग हार्नेस और बैटरी पैक में हजारों टन कॉपर का इस्तेमाल किया जाता है, जिसके बिना वाहन का निर्माण संभव ही नहीं है। इसके अलावा घरों में इस्तेमाल होने वाले पंखे, एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, ट्रांसफार्मर, इनवर्टर और तमाम घरेलू बिजली के उपकरण भी तांबे के दाम बढ़ने के कारण सीधे तौर पर महंगे हो जाएंगे। कंपनियों के लिए जब कच्चा माल ही भारी कीमतों पर मिलेगा, तो वे उस बढ़े हुए खर्च का पूरा बोझ अंतिम उपभोक्ता यानी आम जनता की जेब पर ही डालेंगी, जिससे बाजार में हर इलेक्ट्रॉनिक और इंजीनियरिंग सामान की कीमतें तेजी से ऊपर चली जाएंगी।

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्या हैं इस संकट के दूरगामी परिणाम

अर्थशास्त्रियों और कमोडिटी मार्केट के जानकारों का यह मानना है कि अमेरिकी नीतियों के कारण वैश्विक बाजारों में जिस प्रकार की अनिश्चितता पैदा हुई है, वह आने वाले महीनों में महंगाई को और अधिक हवा दे सकती है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा तांबे के आयात के जरिए पूरा करता है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के बढ़ने से आयात बिल बढ़ेगा और देश के भीतर भी महंगाई दर पर इसका दबाव साफ दिखाई देगा। सरकार और औद्योगिक संगठनों के सामने यह एक बड़ी चुनौती बन गया है कि वे किस प्रकार घरेलू उद्योगों को इस मंहगे कच्चे माल के संकट से बचाएं और आम जनता को राहत दें। फिलहाल, जिस तरह के हालात वैश्विक स्तर पर बन रहे हैं, उसे देखते हुए यही सलाह दी जा रही है कि यदि आप घर बनाने, गाड़ी खरीदने या बिजली का कोई बड़ा सामान लेने की सोच रहे हैं, तो कीमतों में और अधिक आग लगने से पहले अपने फैसले को जल्द अमलीजामा पहना लें।

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