भारत बॉर्डर से सिर्फ 50 किमी दूर ड्रैगन का 'टाइम बॉम्ब', चीनी सुपर डैम से मंडराया तबाही का खतरा

भारत बॉर्डर से सिर्फ 50 किमी दूर ड्रैगन का 'टाइम बॉम्ब', चीनी सुपर डैम से मंडराया तबाही का खतरा

China Super Dam near India Border: भारत की सीमा के बेहद करीब तिब्बत में चीन द्वारा बनाए जा रहे दुनिया के सबसे बड़े 'सुपर डैम' को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। खुद चीनी वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की एक आंतरिक स्टडी में इस विशालकाय बांध को एक 'टाइम बॉम्ब' करार दिया गया है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से महज 50 किलोमीटर की दूरी पर यारलुंग जांगबो (ब्रह्मपुत्र नदी) पर बन रहा यह बांध न केवल भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए जल-युद्ध (Water War) का हथियार बन सकता है, बल्कि यह खुद चीन और निचले इलाकों के लिए एक भीषण प्राकृतिक आपदा का सबब भी बन सकता है।

खुद चीन की स्टडी ने क्यों कहा इसे 'टाइम बॉम्ब'?

चीन इस महाविशाल बांध को अपनी पनबिजली क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक ड्रीम प्रोजेक्ट मान रहा है, लेकिन वैज्ञानिकों की नई रिपोर्ट ने उसकी रातों की नींद उड़ा दी है। इस स्टडी के अनुसार, यह बांध जिस इलाके में बनाया जा रहा है, वह अत्यधिक भूकंप संवेदनशील (High Seismic Zone) क्षेत्र में आता है। तिब्बत का यह हिस्सा भौगोलिक रूप से अस्थिर है और यहां लगातार टेक्टोनिक प्लेटों में हलचल होती रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में अगर यहां कोई बड़ा भूकंप आता है, तो इस सुपर डैम का ढांचा पूरी तरह ढह सकता है, जिससे निकलने वाला पानी एक परमाणु बम से भी ज्यादा तबाही लाएगा।

भारत के लिए क्यों बढ़ गई है सबसे बड़ी टेंशन?

अरुणाचल प्रदेश बॉर्डर के पास बन रहे इस बांध से भारत की सुरक्षा और पर्यावरण को सीधा खतरा है। यदि चीन इस बांध के पानी को अचानक रोकता है या एक साथ भारी मात्रा में पानी छोड़ता है, तो भारत के असम और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में विनाशकारी बाढ़ आ सकती है। इसके अलावा, सूखे के दिनों में चीन पानी रोककर भारत के पूर्वोत्तर हिस्सों में पानी की भारी किल्लत पैदा कर सकता है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन इस सुपर डैम का इस्तेमाल भारत के खिलाफ एक रणनीतिक हथियार या 'वॉटर बम' के रूप में करने की पूरी योजना बना चुका है।

पर्यावरणविदों ने दी विनाशकारी जल-प्रलय की चेतावनी

दुनिया भर के भूवैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों ने इस प्रोजेक्ट पर अपनी गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि इतने भारी-भरकम बांध के कारण उस क्षेत्र की जमीन पर अत्यधिक दबाव बढ़ेगा, जिससे 'रिजर्वायर इंड्यूस्ड सिस्मीसिटी' (बांध के कारण आने वाला भूकंप) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अगर यह बांध अपनी क्षमता से अधिक पानी के दबाव या भूकंप के कारण टूटता है, तो निचले इलाकों में रहने वाले करोड़ों लोगों का अस्तित्व एक झटके में मिट जाएगा। यही वजह है कि अब इसे विकास का जरिया नहीं, बल्कि एक बड़े खतरे के रूप में देखा जा रहा है।

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