उत्तराखंड में अब सभी 13 अखाड़े इनके साथ, दुर्गादास महाराज ने किया ऐलान

कुंभ मेला प्रभारी मुखिया महंत दुर्गादास महाराज ने कहा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नेतृत्व में सभी 13 अखाड़े श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के साथ हैं।

हरिद्वार। कुंभ मेला प्रभारी मुखिया महंत दुर्गादास महाराज ने कहा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नेतृत्व में सभी 13 अखाड़े श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के साथ हैं। श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के अध्यक्ष हैं। उनके नेतृत्व में कई कुंभ संपन्न हुए हैं। 2021 का कुंभ स्नान श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के संत उनके नेतृत्व में ही करेंगे।
Mahant Durgadas Maharaj
उन्होंने कहा कि श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज व अखाड़े की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे अराजक तत्वों को कामयाब नहीं हो दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि संत के वेश में आए असामाजिक तत्व अराजकता फैलाकर माहौल खराब करना चाहते हैं। यह तत्व पहले भी निर्मल अखाड़े की संपत्ति पर कब्जा करने का प्रयास कर चुके हैं।
श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल में प्रेसवार्ता में श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के मुखिया महंत व कुंभ मेला प्रभारी दुर्गादास महाराज ने कहा कि गुरुवार को श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज पर आरोप लगाने वाले न तो अखाड़े के पदाधिकारी हैं और न ही उनका अखाड़े से कुछ लेना देना है। अखाड़ों की परंपरा है कि अखाड़ों में होने वाले किसी भी प्रकार के विवाद को अखाड़े के रमता पंच व अन्य पदाधिकारी आपस में मिलजुल कर सुलझाते हैं। सड़कों पर प्रदर्शन करना संत परंपरा नहीं हैं। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस प्रशासन को ऐसे लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए।

किसी को भी अखाड़ों की पंरपरा को नष्ट नहीं करने दिया जाएगा

स्वामी प्रबोधानन्द गिरी महाराज ने कहा कि किसी को भी अखाड़ों की पंरपरा को नष्ट नहीं करने दिया जाएगा। सभी अखाड़े व संत समाज श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के साथ खड़े हैं। संत का चोला पहनाकर अराजकता फैला रहे असामाजिक तत्वों के खिलाफ पुलिस व प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए।
अखाड़े के कोठारी महंत जसविन्दर सिंह महाराज ने कहा कि श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज के प्रति अपशब्द निंदनीय टिप्पणी व उनकी छवि धूमिल करने के प्रयासों को कतई सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अराजकता फैला रहे असामाजिक तत्वों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करायी जाएगी। महंत खेमसिंह, महंत बाबूसिंह, संत सुखमन सिंह, संत तलविन्दर सिंह, संत जसकरण सिंह आदि संतों ने भी श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज के खिलाफ अपशब्द कहने वालों की निंदा की।

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