Petrol- diesel की कीमत ने सबको रुलाया, 8 साल के सर्वोच्च स्तर पर थोक महंगाई

महंगाई दर के आखिरी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल के महीने में ही थोक महंगाई दर मार्च के 7.3 फीसदी से बढ़कर 10.49 फीसदी हो गई थी।

नई दिल्ली।। कोरोना संक्रमण काल में देश की आर्थिक स्थिति बुरी तरह से चरमराई हुई है। बेरोजगारी दर चरम पर पहुंच गई है। ऐसे समय में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ रही कीमत ने महंगाई को भी पलीता लगा दिया है। पेट्रोल और डीजल के आसमान छूते भाव के कारण थोक महंगाई दर पर भी काफी असर पड़ा है। डीजल के महंगा होने के कारण माल ढुलाई महंगी हो गई है, जिसके कारण हर चीज के दाम में इजाफा हो गया है।

जानकारों के मुताबिक देश में थोक महंगाई दर पिछले आठ साल के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई है। महंगाई दर के आखिरी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल के महीने में ही थोक महंगाई दर मार्च के 7.3 फीसदी से बढ़कर 10.49 फीसदी हो गई थी। थोक महंगाई दर के आंकड़ों को जारी करते वक्त वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी स्पष्टीकरण में साफ किया गया था कि इस दर में 3.1 फीसदी की बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह है पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत में हुई बढ़ोतरी है।

जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) की कीमत में लगातार बढ़ोतरी होने के कारण भारत में भी पेट्रोल और डीजल की कीमत में भी लगातार आग लगी हुई है। इस साल फरवरी के महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में 61 डॉलर प्रति बैरल की कीमत पर बिक रहा कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) 72.70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में आई जोरदार उछाल के कारण भारत में सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को भी मजबूरन पेट्रोल और डीजल की कीमत में लगातार बढ़ोतरी करनी पड़ रही है।

कच्चे तेल के महंगा होने की वजह से इस साल पेट्रोल और डीजल की कीमत 49 बार बढ़ाई जा चुकी है। जिसके कारण राजधानी दिल्ली में ही पेट्रोल की कीमत में इस साल 6 महीने से भी कम की अवधि यानी 163 दिनों में ही पेट्रोल की कीमत में 12.15 रुपये प्रति लीटर की और डीजल की कीमत में 12.86 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है।

दिल्ली मार्केट एसोसिएशन के मुताबिक पेट्रोल और डीजल की कीमत में लगातार हो रही बढ़ोतरी की वजह से उनपर माल ढुलाई का बोझ काफी बढ़ गया है। डीजल की कीमत आई उछाल के कारण इस साल अभी माल ढुलाई की दर में 15 से 22 फीसदी तक का उछाल आ चुका है। जिसकी वजह से बाहर से मंगाई जाने वाली चीजों की खुदरा कीमत भी बढ़ गई है। बयान में ये भी स्पष्ट किया गया है कि अगर पेट्रोल और डीजल की कीमत में उछाल का सिलसिला जारी रहा, तो इसकी वजह से महंगाई भी ऊंची छलांग लगा सकती है।

दूसरी ओर कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि महंगाई दर में बढ़ोतरी होने के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमत में कमी आने की तत्काल कोई उम्मीद नहीं है। भूमिदेव कमोडिटीज के वाइस प्रेसिडेंट अनुराग राय का इस संबंध में कहना है कि पिछले डेढ़ से दो महीने के दौरान दुनिया भर में कोरोना के संक्रमण पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है। जिसके कारण कई देशों में आर्थिक गतिविधियां जोर पकड़ने लगी हैं। विकसित देशों समेत कई देशों ने अपनी अर्थव्यवस्था पूरी तरह से खोल दी है। इस वजह से दुनिया भर में पेट्रोलियम उत्पादों की खपत लगातार बढ़ती जा रही है।

दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था के पूरी तरह से खुल जाने के बावजूद ओपेक और उसके सहयोगी देश कच्चे तेल के उत्पादन में फिलहाल बढ़ोतरी करने के लिए तैयार नहीं हैं। अनुराग राय के मुताबिक ओपेक और उसके सहयोगी देशों के इसी हठी रवैये के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेली की कीमत बढ़ती जा रही है। जिसका असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत पर भी पड़ रहा है।

साफ है कि अगर आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में कमी नहीं होती है, तो भारत में भी पेट्रोल और डीजल की कीमत में राहत मिलने की संभावना काफी कम है। जिसका असर आखिरकार आम उपभोक्ताओं की जेब पर ही प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों रूप में पड़ेगा। लोगों को जहां अपनी गाड़ियों के लिए महंगा पेट्रोल खरीदना पड़ेगा, वहीं डीजल की कीमत बढ़ने की वजह से महंगाई दर में हुई बढ़ोतरी के कारण परोक्ष रूप से भी अपनी जेब को ही ढीला करना पड़ेगा।

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