Chauri Chaura Incident के शताब्दी समारोह में बोले पीएम – आग थाने में नहीं जन-जन के दिलों में लगी थी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गोरखपुर में प्रारंभ हुए चौरी-चौरा कांड (Chauri Chaura Incident) के शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे।

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि सौ साल पहले चौरी-चौरा (Chauri Chaura Incident) में आग थाने में ही नहीं लगी थी, लोगों के दिलों में भी लगी थी। चौरी-चौरा में जो हुआ वह बहुत व्यापक आंदोलन था। पीएम मोदी ने कहा कि पहले जब भी इस घटना की चर्चा हुई, इसे सिर्फ आगजनी की घटना के रूप में ही देखा गया। अहम यह है कि आगजनी क्यों हुई ?

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गोरखपुर में प्रारंभ हुए चौरी-चौरा कांड (Chauri Chaura Incident) के शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे। पीएम मोदी ने कहा कि सौ वर्ष पहले चौरीचौरा में सिर्फ एक आगजनी की घटना या एक थाने में आग लगा देने की घटना नहीं थी। चौरीचौरा का संदेश बहुत व्यापक था।

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पीएम मोदी ने कहा कि पहले जब भी चौरीचौरा कांड (Chauri Chaura Incident) को सिर्फ एक आगजनी के संदर्भ में ही देखा गया। आगजनी किन परिस्थितियों में हुई, क्यों हुई, ये ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आग थाने में नहीं लगी थी, आग जन-जन के दिलों में प्रज्ज्वलित हो चुकी थी।

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पीएम मोदी ने कहा कि इस साल जब देश अपनी आजादी के 75वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। ऐसे में इस तरह के सामारोह इसे और भी प्रासंगित बना देते हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने चौरीचौरा (Chauri Chaura Incident) के ऐतिहासिक संग्राम के शताब्दी समारोह की प्रसंशा करते हुए एक डाक डिकट भी जारी किया।

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उल्लेखनीय है कि ऐतिहासिक चौरीचौरा कांड (Chauri Chaura Incident) की समृति में उत्तर प्रदेश सरकार शताब्दी समारोह मना रही है। आज से शुरू हो रहे ये कार्यक्रम सूबे के सभी जिलों में पूरे साल चलते रहेंगे। इस दौरान चौरीचौरा के साथ ही हर गांव और क्षेत्र के वीर बलिदानियों को भी याद किया जाएगा।

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भारत स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में चार फरवरी 1922 को चौरीचौरा काण्ड (Chauri Chaura Incident) हुआ था। चौरीचौरा में असहयोग आंदोलन के समर्थन में जुलूस निकल रहा था। इसी दौरान एक सिपाही ने एक आंदोलनकारी की गांधी टोपी को पांवों तले रौंद दिया था। इसपर पुलिस के साथ उसकी झड़प हुई। आक्रोशित सत्याग्रहियों पुलिसवालों को दौड़ा लिया। भयभीत पुलिसवाले भागकर थाने में छिपकर फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें तीन सत्याग्रही मौके पर शहीद हो गए।

पुलिस कीफायरिंग से प्रदर्शनकारियों का आक्रोश भड़क गया। प्रदर्शनकारियों ने बाहर से कुंडी लगाकर थाने में आग लगा दी। Chauri Chaura Incident में 23 पुलिसकर्मियों की जलकर मौत हो गई थी और 50 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस घटना से आहत महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया।

चौरीचौरा काण्ड (Chauri Chaura Incident) में 172 लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई थी, लेकिन पंडित मदन मोहन मालवीय की पैरवी से इनमें से 151 लोग फांसी की सजा से बच गये। सेष19 लोगों को जुलाई 1923 में फांसी की सजा दी गई। इसके अलावा 14 लोगों को उम्र कैद और 10 लोगों को 8 साल की सश्रम कारावास की सजा हुई थी।

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