फिल्म 'सतलुज' विवाद: दुर्गियाना मंदिर कमेटी ने कहा, 'संवैधानिक मर्यादाओं और तथ्यों के आधार पर हो फैसला'

फिल्म 'सतलुज' विवाद: दुर्गियाना मंदिर कमेटी ने कहा, 'संवैधानिक मर्यादाओं और तथ्यों के आधार पर हो फैसला'

पंजाब के संवेदनशील मुद्दों पर आधारित फिल्म 'सतलुज' (पूर्व नाम 'पंजाब 95') को लेकर जारी विवाद के बीच अमृतसर की दुर्गियाना मंदिर कमेटी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। कमेटी ने स्पष्ट किया है कि ऐसे विषयों पर कोई भी निर्णय भावनाओं के बजाय कानूनी प्रक्रिया, ऐतिहासिक तथ्यों की सत्यता और संवैधानिक मर्यादाओं को ध्यान में रखकर ही लिया जाना चाहिए ताकि सामाजिक सद्भाव बना रहे।

विवाद का केंद्र और कमेटी का रुख

फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने और सेंसरशिप को लेकर चल रही बहस के बीच मंदिर कमेटी ने संयमित रुख अपनाते हुए कहा है कि किसी भी कलाकृति को प्रदर्शित करने से पूर्व यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि वह समाज के किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को आहत न करे। मंदिर प्रशासन ने फिल्म से जुड़े सभी पक्षों से अपील की है कि वे धैर्य रखें और मामले का हल उचित सरकारी नियमों और कानून के दायरे में रहकर ही निकालें।

सामाजिक सद्भाव की अपील

दुर्गियाना मंदिर कमेटी ने जोर दिया है कि अमृतसर जैसे पवित्र शहर में किसी भी तरह के विवाद के बजाय आपसी भाईचारे को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कमेटी ने विश्वास जताया है कि सरकार और संबंधित सेंसर बोर्ड इस मामले में निष्पक्ष जांच करेंगे और तथ्यों की पुष्टि के बाद ही कोई अंतिम निष्कर्ष निकालेंगे। यह फिल्म लंबे समय से अपनी रिलीज और कंटेंट को लेकर विवादों के घेरे में है, जिस पर अब धार्मिक संस्थाओं की नजर भी बनी हुई है।

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