गुरु अस्त के साथ थमा शादियों का शोर: अब शहनाई बजाने के लिए करना होगा लंबा इंतजार, जानें कब से शुरू होंगे विवाह मुहूर्त!
हिंदू धर्म में शादियों और मांगलिक कार्यों के लिए 'गुरु तारा' (बृहस्पति देव) का उदित होना बेहद अनिवार्य माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गुरु के अस्त होने के साथ ही देश भर में शादियों के सीजन पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। शहनाइयों की गूंज और शादी-ब्याह की रौनक अब कुछ महीनों के लिए शांत हो गई है।
ऐसे में जिन परिवारों में शादी की बात चल रही है या जो लोग नए रिश्तों की शुरुआत के लिए शुभ मुहूर्त तलाश रहे हैं, उन्हें अब एक लंबा इंतजार करना होगा। आइए ज्योतिष गणना के आधार पर जानते हैं कि अब साल 2026 में शहनाइयां दोबारा कब से बजना शुरू होंगी।
क्यों गुरु अस्त होने पर नहीं होते मांगलिक कार्य?
सनातन परंपरा में देवगुरु बृहस्पति को बुद्धि, ज्ञान, वैवाहिक सुख और सौभाग्य का कारक माना जाता है। जब भी आकाश मंडल में गुरु तारा अस्त होता है, तो उस अवधि को शुभ कार्यों के लिए वर्जित मान लिया जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, गुरु के कमजोर या अस्त होने की स्थिति में किए गए विवाह के सफल होने की संभावना कम हो जाती है और दांपत्य जीवन में परेशानियां आ सकती हैं। यही वजह है कि गुरु अस्त के दौरान कोई भी नया या मांगलिक कार्य जैसे मुंडन, गृह प्रवेश और विवाह नहीं किया जाता।
चातुर्मास और देवशयन भी बढ़ाएगा इंतजार
गुरु अस्त के बाद अब जल्द ही चातुर्मास (देवशयन) का समय भी शुरू हो जाएगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) से भगवान विष्णु अगले चार महीनों के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान सृष्टि के संचालक के विश्राम करने के कारण कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है। गुरु अस्त और चातुर्मास के इस दोहरे संयोग के कारण अब विवाह के आयोजनों पर पूरी तरह से रोक रहेगी।
अब कब गूंजेगी शहनाई? जानें साल 2026 के अगले शुभ मुहूर्त
शादियों के शौकीनों और वर-वधू पक्ष का यह लंबा इंतजार कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी के दिन समाप्त होगा। इस दिन भगवान विष्णु अपनी चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं, जिसे 'तुलसी विवाह' के रूप में भी धूमधाम से मनाया जाता है। देवउठनी एकादशी के अबूझ मुहूर्त के साथ ही देश में एक बार फिर शादियों का सीजन शुरू हो जाएगा।
साल 2026 के अंतिम महीनों में विवाह के प्रमुख शुभ मुहूर्त कुछ इस प्रकार रहने की उम्मीद है:
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नवंबर 2026: देवउठनी एकादशी के बाद नवंबर महीने के उत्तरार्ध से विवाह की शुभ तिथियां शुरू हो जाएंगी।
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दिसंबर 2026: दिसंबर महीने में खरमास (15 दिसंबर के आसपास) शुरू होने से पहले तक शादियों के कई शानदार मुहूर्त मिलेंगे।
इसलिए, अगर आपके घर में भी शादी की शहनाई बजने वाली है, तो अभी से नवंबर और दिसंबर 2026 की तैयारियों में जुट जाइए, क्योंकि साल के अंत में शादियों का यह सीजन बेहद धमाकेदार होने वाला है!