Har Har Mahadev: सावन का पहला सोमवार आज, महादेव को ऐसे करें प्रसन्न; जानें शुभ मुहूर्त, सुकर्मा योग और राहुकाल की सटीक जानकारी
हिंदू धर्म में देवों के देव महादेव को समर्पित पवित्र सावन मास की शुरुआत हो चुकी है और आज सावन का पहला सोमवार व्रत रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इस दौरान विधि-विधान से शिव आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आज के दिन शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है और हर कोई भोलेनाथ के जलाभिषेक की तैयारियों में जुटा है। यदि आप भी आज व्रत रख रहे हैं या पूजा-अर्चना करने वाले हैं, तो घर से निकलने या थाली सजाने से पहले आज का पंचांग, शुभ योग और राहुकाल का समय जरूर जान लें।
आज का पंचांग और मुख्य ग्रह-नक्षत्र स्थिति
वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 3 अगस्त 2026 को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है, जो रात्रि 10 बजकर 54 मिनट तक रहेगी। आज का दिन सोमवार होने के कारण इसकी महत्ता और अधिक बढ़ जाती है। आज का पूरा दिन और रात चंद्रमा मीन राशि पर संचार करेगा, जबकि सूर्य देव कर्क राशि में विराजमान रहेंगे। इसके साथ ही आज ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास 'सुकर्मा योग' का निर्माण हो रहा है, जो पूजा-पाठ और अनुष्ठान के लिए बहुत उत्तम माना जाता है।
सावन के पहले सोमवार के शुभ मुहूर्त और चौघड़िया
शिवलिंग पर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के लिए सही समय का चुनाव करना बहुत जरूरी होता है। आज के दिन आप निम्नलिखित शुभ मुहूर्तों में भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं:
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ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:19 बजे से 05:01 बजे तक
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक (सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त)
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प्रदोष काल: शाम 06:26 बजे से 07:56 बजे तक
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निशिता काल: रात्रि 11:33 बजे से 12:21 बजे तक
राहुकाल और अन्य अशुभ समय
धार्मिक और ज्योतिषीय कार्यों में राहुकाल के दौरान पूजा-पाठ या किसी भी नए कार्य की शुरुआत करने से बचा जाता है। आज सावन के पहले सोमवार पर राहुकाल सुबह 07:27 बजे से सुबह 09:07 बजे तक रहेगा। इसलिए इस समयावधि में शुभ कार्यों या पूजन से परहेज करना चाहिए। इसके अलावा यम गण्ड सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक और कुलिक काल दोपहर 02:07 बजे से दोपहर 03:46 बजे तक रहेगा।
शिव पूजा की विधि और ध्यान रखने योग्य बातें
सावन के पहले सोमवार के दिन सुबह जल्दी स्नान कर स्वच्छ और सात्विक वस्त्र धारण करें। इसके बाद मंदिर या घर में ही भगवान शिव का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें। शिवलिंग पर सबसे पहले शुद्ध जल और गंगाजल अर्पित करें, फिर पंचामृत से स्नान कराएं। पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का लगातार जाप करें। भोलेनाथ को बेलपत्र, शमी के पत्ते, भांग, धतूरा, सफेद चंदन, अक्षत और मौसमी फल बेहद प्रिय हैं, इन्हें पूरी श्रद्धा के साथ अर्पित करें। अंत में घी का दीपक जलाकर आरती करें और जरूरतमंदों को दान-पुण्य अवश्य करें।