उत्तराखंड आपदा के कारणों की खोज करेंगे वैज्ञानिक, अब तक 19 शव मिले, इतने लापता

उत्तराखंड के चमोली जिले में रविवार को ग्लेशियर टूटने के बाद हुई तबाही के मलबे में दबे 19 लोगों के शव अब तक बरामद किए गए हैं।

देहरादून। उत्तराखंड के चमोली जिले में रविवार को ग्लेशियर टूटने के बाद हुई तबाही के मलबे में दबे 19 लोगों के शव अब तक बरामद किए गए हैं। एक टनल में फंसे 15 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है। हादसे में अभी तक लगभग 202 लोगों के लापता होने की सूचना है। आज प्रभावित इलाकों में राशन तथा अन्य सामग्री का वितरण हेलिकॉप्टर से करवाया गया है। मुख्य मंत्री ने इस घटना के कारणों का पता लगाने के लिए मुख्य सचिव को निर्देश दिये हैं। इसरो के वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों की मदद से इस घटना के कारणों का पता लगाया जायेगा ताकि भविष्य में कुछ एहतियात बरती जा सके।
Uttarakhand glacier catastrophe

अब तक 202 लोग लापता

​उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि टनल में 80 मीटर तक मलबा हटाया जा चुका है। अब तक कुल 15 व्यक्तियों को रेस्क्यू किया गया है और 19 शव अलग-अलग स्थानों से बरामद किए गए हैं। उन्होंने बताया कि इस हादसे में अब तक 202 लोग लापता हैं जिनमें रेणी गांव के 05, तपोवन ऋत्विक कंपनी के 121 श्रमिक, करछो और रिंगी गांव के 02-02, ऋषिगंगा कंपनी के 46, ओम मैटल कंपनी के 21, एचसीसी के 03, तपोवन गांव के 02 लोग लापता हैं। इनमें तपोवन टनल में 25-35 लोग अभी भी फंसे हैं जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत बोले

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि तपोवन गांव के पास विष्णु गंगा प्रोजक्ट में काफी श्रमिक कार्य कर रहे थे। अभी तक 19 शव बरामद किये जा चुके हैं और लापता लोगों की तलाश की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जोशीमठ के रेणी क्षेत्र से ग्लेशियर टूटने से उत्पन्न आपदा के कारण डीजीपी कल से ही इस क्षेत्र में कैम्प किये हुए हैं। कमिश्नर गढ़वाल और डीआईजी गढ़वाल को भी आज से क्षेत्र में कैम्प करने के निर्देश दिये गये हैं। जिला प्रशासन की पूरी टीम कल से ही क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्यों में लगी है। अन्य जिलों से भी अधिकारी मौके पर भेजे गये हैं, ताकि बरामद शवों का पंचनामा एवं पोस्टमार्टम जल्द हो सके।

रेस्क्यू अभियान जारी

उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, पुलिस, आईटीबीपी, सेना और एनडीआरएफ की टीमें कल से राहत एवं बचाव कार्यों में लगी हैं। 35 लोगों के एक सुरंग में फंसे होने की संभावना है, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं। कल से ही इन लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान जारी है। मौके पर पर्याप्त मानव संसाधन है और एनडीआरएफ की अन्य टीमें भी तैयार हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि इस घटना के कारणों का पता लगाने के लिए मुख्य सचिव को निर्देश दिये गये हैं। इसरो के वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों की मदद से इस घटना के कारणों का पता लगाया जायेगा ताकि भविष्य में कुछ एहतियात बरती जा सके।

आपदा से प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत सामग्री का वितरण करवाना शुरू

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के मुताबिक चमोली में आई आपदा से प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत देने के लिए 1000 राशन और आवश्यक सामग्री के पैकेट तैयार कर लिए गए हैं। आज तपोवन के हेलीपैड से हेलिकॉप्टर के माध्यम से प्रभावित इलाकों में राशन तथा अन्य सामग्री का वितरण करवाना शुरू कर दिया गया है। इस सामग्री किट में 5 किलो आटा, 05 किलो चावल, एक किलो दाल, एक किलो चीनी, 200 ग्राम चाय पत्ती, एक किलो नमक, एक पैकेट मोमबत्ती, एक लीटर खाद्य तेल, मसाले, नहाने एवं कपड़े धोने के साबुन, माचिस और मिल्क पाउडर शामिल है। 
 
गढ़वाल के सांसद तीरथ सिंह रावत, जनपद प्रभारी मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, विधायक महेंद्र प्रसाद भट्ट, विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी ने भी तपोवन एवं रैणी में आपदा प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया। इस दौरान गढ़वाल सांसद एवं प्रभारी मंत्री  प्रभावित परिवारों के परिजनों से मिले और उन्हें हर संभव मदद पहुंचाने का भरोसा दिलाया। प्रभारी मंत्री ने कहा कि यहां पर जिला प्रशासन, पुलिस, आईटीबीपी, आर्मी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, बीआरओ सभी मिलकर युद्ध स्तर पर रात-दिन रेस्क्यू में जुटे हैं और जिन्दगियों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। 

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