कोरोना की दूसरी लहर : धरासायी स्वास्थ्य सुविधायें, बेहिसाब मौतें, आत्ममुग्ध सरकार

भारत एक साल से कोरोना महामारी का दंश झेल रहा है। इस महामारी ने कई अहम सवाल भी खड़े किए और कई चेहरों को बेनकाब भी किया है।

विशेष संवाददाता

Lucjnow। देश में कोरोना की दूसरी लहर ने स्वास्थ्य सुविधाओं को धरासायी करने के साथ ही केंद्र की मोदी सरकार पाखंडों की भी पोल खोल दी है। इसके बावजूद देश के अधिकांश अखबार और चैनल सरकार की पीठ थपथपा रहे हैं। गोदी मीडिया राग अलाप रही है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने कोरोना काल में वैश्विक स्तर पर बेहतर कार्य किया है। कई देशों को कोरोना वैक्सीन भेजकर पीएम मोदी खुद ही अपनी तारीफ़ कर रहे हैं। यही नहीं प्रधानमंत्री, गृहमंत्री समेत सरकार के अधिकंश जिम्मेदार लोग चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं।

भारत एक साल से कोरोना महामारी का दंश झेल रहा है। इस महामारी ने कई अहम सवाल भी खड़े किए और कई चेहरों को बेनकाब भी किया है। कोरोना ने मौजूदा सत्ता के आडंबर पाखंड और दोहरे मानदंडों की भी पोल खोल दी है। इस वैश्विक महामारी के प्रारंभ में प्रधानमंत्री ने ठोस उपाय करने के बजाय थाली, ताली व घन्टी बजाने और बजवाने जैसा मजाक किया। देश में दुनिया का सबसे सख्त लॉकडाउन किया। देश की अर्थव्यवस्था रसातल में चली गई।

उल्लेखनीय है कि वैश्विक महामारी कोरोना के आने की आहट वर्ष 2019 के आखिरी महीनों में ही होने लगी थी। भारत में जनवरी 2020 में ही कोरोना का पहला मामला केरल में सामने आया था। उस समय कोई ठोस उपाय करने के बजाय भारत सरकार ने सिर्फ चीन से आने वाली उड़ानों के यात्रियों की हवाई अड्डों पर जांच करने का आदेश देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली थी।

ध्यातव्य है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कोरोना संकट की ओर सरकार का ध्यान दिलाने के लिए 31 जनवरी 2020 को अपना पहला ट्वीट किया था, लेकिन सत्ता प्रतिष्ठान और उससे जुड़े संगठनों ने उनकी राय को हंसी में उड़ा दिया। इसके बाद राहुल गांधी 23 मार्च तक लगातार कोरोना की भयावहता और उसकी तैयारियों को लेकर सरकार को सतर्क करने की कोशिश करते रहे, लेकिन सरकार और उसके अंध भक्त राहुल गांधी की चेतावनियों का मजाक ही बनाते रहे।

इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना काल में ही विगत पांच अगस्त को कोविड प्रोटोकाल को तोड़कर अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का भूमि पूजन भी किया, जबकि उस समय देव शयनकाल चल रहा था। सनातन परंपरा के अनुसार देव शयनकाल में सारे शुभ कार्य वर्जित हैं। इसी वजह से चारो शंकराचार्य व अन्य प्रमुख धर्माचार्य भी भूमि पूजन में अनुपस्थित रहे।

इसी तरह असम और पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह समेत लगभग सभी केंद्रीय मंत्रियों और बीजेपी शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने लगातार चुनावी रैलियां और रोडशो किये। इस दौरान दो गज की दूरी, मास्क जरुरी मजाक बनकर रह गया। जबकि इस समय प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को कोरोना से निपटने को लेकर गंभीर होना चाहिए था।

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मीडिया में कोविड मैनेजमेंट की सराहना से भरी ख़बरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अच्छी लगती होंगी। प्रधानमंत्री खुद कई बार कह चुके हैं कि उनकी सरकार के दौरान विश्व में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। गोदी मीडिया और मोदी भक्त भी यही राग अलापते रहे हैं। इस बीच अमेरिका समेत कई विकसित देशों ने कोरोना संकट के चलते अपने नागरिकों से भारत न जाने की सलाह दी है।

इसी तरह ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने दूसरी बार अपनी भारत यात्रा को कैंसल कर दी है। पिछली बार जनवरी में गणतंत्र दिवस समारोह में उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना था, लेकिन ऐन वक्त पर उन्होंने भारत आने से मना कर दिया था। पिछले 55 वर्षों में यह पहली बार था कि भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में कोई मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद नहीं था।

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