शनि की साढ़ेसाती : दुष्प्रभावों से बचने के लिए करें ये उपाय, कष्टों को दूर करेंगे न्याय के देवता

अच्छे और बुरे दोनों तरह के फल देती है शनि की साढ़ेसाती

Prabhat Vaibhav Desk। देवताओं में सूर्य पुत्र शनिदेव न्याय के देवता माने जाते हैं। वह हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। लेकिन समाज में यह गलत धारणा फ़ैल गई है की शनिदेव सिर्फ दंड ही देते हैं। शनि की साढ़ेसाती का नाम सुनते ही ज्यादातर लोग घबरा जाते हैं, लगता है कि कुछ बुरा होने वाला है। लेकिन ये गलत धारणा पूरी तरह से गलत है। शनि की साढ़ेसाती अच्छे और बुरे दोनों तरह के फल देती है। यदि किसी व्यक्ति का कर्म अच्छा है तो साढ़ेसाती में उसकी आकांक्षाओं की पूर्ति होगी।

ज्योतिषविदों के अनुसार शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव व्यक्ति की जन्म कुंडली के योग पर निर्भर करता है। बताते चलें कि गोचर का शनि जब चंद्र राशि से एक भाव पहले भ्रमण करना शुरू करता है, तब व्यक्ति की शनि की साढ़ेसाती शुरू होती है। इस दौरान व्यक्ति को स्वानुशासन में रहते हुए सात्विकता से रहना चाहिए और पूजा-पाठ करना चाहिए। नकारात्मक प्रवृत्ति के लोगों से दूर रहना बेहतर होगा।

शनि की साढ़ेसाती के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए करें ये उपाय …

शनि की साढ़ेसाती के प्रभाव से जीवन में बदलाव अवश्य होते हैं। यह सकारात्मक भी हो सकते हैं और नकारात्मक भी। अगर साढ़ेसाती से अशुभ परिणाम मिलने वाले हों तो आने वाली परेशानियों से बचने के लिए आपको ये उपाय करने चाहिए –

शनि के बीज मंत्र का जाप

शनि की साढ़ेसाती के दुष्प्रभावों से बचने के लिए शनि का दान, मंत्र जाप और शनि की पूजा करनी चाहिए। इस दौरान शनि के बीज मंत्र- ‘ऊँ प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नम:’ का जाप और शनि स्तोत्र का पाठ करना विशेष लाभप्रद होता है। साढ़ेसाती के दौरान शनि मंत्र- ऊँ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का 108 बार जाप करने से भी शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है।

पीपल के वृक्ष के पास जलाएं दीया

शनि की साढ़ेसाती के दुष्प्रभावों से बचने के लिए प्रतिदिन सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के नीचे दीया जलाना सहज उपाय माना गया है। ऐसा नित्य करने से साढ़ेसाती के दुष्प्रभावों से बचने के साथ ही शनिदेव की विशेष कृपा बनी रहती है। शनि की साढ़ेसाती के सारे दुष्प्रभाव खत्म हो जाते हैं।

शनिवार व्रत

शनि की साढ़ेसाती के दुष्प्रभावों को निष्प्रभावी करने के लिए शनिवार के दिन व्रत रखना उत्तम होता है। शनिवार को शनिदेव की पूजा करके उन्हें नीले रंग का फूल अर्पित करना चाहिए। इसके साथ ही शनिदेव की पसंदीदा चीजें जैसे- काली उड़द की दाल, काले वस्त्र, सरसो का तेल, लोहा, काला तिल, आदि का दान करना विशेष तौर पर लाभदायक होता है।

हनुमत आराधना

श्रीराम भक्त हनुमान जी की पूजा-अर्चना शनि की साढ़ेसाती के दुष्प्रभावों से बचने का सबसे सहज और सरल उपाय है। शास्त्रों के अनुसार एक बार शनिदेव ने हनुमान जी को वचन दिया था कि जो भी आपकी पूजा करेगा, उसे मैं कभी परेशान नहीं करूंगा। इसलिए शनि की साढ़ेसाती के बुरे प्रभाव से बचने के लिए हनुमान जी की आराधना जरूर करनी चाहिए। हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और श्रीहनुमाष्टक का पाठ करने से शनि की साढ़ेसाती के दुष्प्रभाव क्षीण हो जाते हैं।

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