मान-सम्मान और पगड़ी बचाने के संघर्ष में तब्दील हुआ किसान आंदोलन

किसान दिल्ली से मान-सम्मान के साथ ही जाएगा - राकेश टिकैत

नए कृषि कानूनों के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन अब किसानों के मान-सम्मान के संघर्ष में तब्दील हो चुका है। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है कि किसान दिल्ली से मान-सम्मान के साथ ही जाएगा। ये लड़ाई किसानों की पगड़ी और उसके मान सम्मान की लड़ाई है। हम दिल्ली से हटेंगे, तो सम्मान के साथ ही हटेंगे। किसान बेइज़्ज़त होकर नहीं जाएगा। टिकैत ने कहा कि किसानों को बदनाम करने की सरकार की साजिश का पर्दाफाश किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि गणतंत्र दिवस पर किसानों के ट्रैक्टर परेड के दौरान लाल किले पर प्रायोजित हिंसा के बाद केंद्र सरकार ने किसान नेताओं को अपराधी साबित करना शुरु किया। उनके खिलाफ देशद्रोह की धारा के तहत केस दर्ज कर लुक आउट नोटिस जारी किया गया और पुलिस-प्रशासन को आगे कर दिया गया। इस तरह भी दिखाकर सरकार ने किसान आंदोलन को कुचलने का भरसक प्रयास किया।

सरकार और उसके समर्थक तत्व शुरू से ही किसानों के किये खालिस्तानी, पाकिस्तानी, नक्सली और उपद्रवी जैसे शब्दों का प्रयोग कर रहे थे। किसान आंदोलन को लेकर मीडिया की भूमिका भी नकारात्मक ही रही। ज्यादातर समाचार चैनल किसानों का मान-मर्दन ही करते रहे।

अब किसान सरकार और मीडिया के रवैये को अपनी तौहीन समझ रहा है। किसानों के लिए मान-सामान और पगड़ी सबसे बढ़कर है। वह जान दे देता है, लेकिन इससे समझौता नहीं करता। मुजफ्फरनगर में कल अचानक बुलाई गई महापंचायत में उमड़ा हुजूम इस बात की तस्दीक करता है कि यह आंदोलन अब किसानों के मान-सम्मान और पगड़ी को बचाने के संघर्ष में तब्दील हो चुका है। किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने भी कहा कि किसानों के सम्मान को ठेस पहुंची है।

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