यूपी में बेसिक शिक्षा का हाल : हर बार विवादों के घेरे में रही शिक्षक भर्ती प्रक्रिया

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा का कोई पुरसा हाल नहीं है। प्रदेश में बड़े पैमाने पर बेसिक शिक्षकों के पद खाली हैं। विगत डेढ़ दशकों में हर बार शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया विवादों के घेरे में रही। इसके चलते परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य भगवान भरोसे ही है। ताजा मामला 69 हजार सहायक शिक्षकों के भर्ती का है। 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती के लिए 06 जनवरी 1919 को परीक्षा आयोजित की गई थी। अगले दिन सात जनवरी को विभाग ने सामान्य वर्ग के लिए 65 प्रतितशत (150 में से 97 अंक) और एससी, एसटी एवं ओबीसी अभ्यर्थियों के लिए 60 प्रतिशत (150 में से 90 अंक) कटऑफ निर्धारित किया गया था। कटऑफ को लेकर शिक्षा मित्र हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने शिक्षा मित्रों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए शिक्षकों की भर्ती के लिए निर्धारित कटऑफ के अनुसार परिणाम जारी करने का आदेश दिया।

प्रदेश सरकार ने सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ डबल बेंच में अपील की। लगभग सवा साल तक चली सुनवाई के बाद डबल बेंच ने गत 6 मई, 2020 को सरकार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सरकार की ओर से निर्धारित 65 और 60 प्रतिशत कटऑफ को सही करार दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय ने गत 12 मई को परिणाम जारी कर दिया। इसमें 69 हजार पदों पर एक लाख 46 हजार 60 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए। बेसिक शिक्षा विभाग ने एक जून को 67,867 अभ्यर्थियों की मेरिट जारी की और तीन जून से काउंसलिंग शुरू कर दी। प्रश्नों पर आपत्तियों के चलते काउंसलिंग के पहले दिन ही हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी।

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ रामशरण मौर्य और कुछ अन्य अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकार को शिक्षा मित्रों द्वारा धारित सहायक अध्यापकों के पदों को छोड़कर शेष पदों पर भर्ती करने का आदेश दिया। मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के इसी आदेश के तहत 31,661 पदों पर नियुक्ति के आदेश दिए।

ध्यातव्य हाई कि सरकार द्वारा निर्धारित 60 व 65 फीसदी कटऑफ के आधार पर 8018 शिक्षा मित्र ही सफल हुए थे। शिक्षा मित्रों ने अपील में कहा था कि अगर कटऑफ 40 और 45 प्रतिशत होती तो 37 हजार से अधिक शिक्षा मित्र चयनित होते। यही नहीं 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती पर राष्ट्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने रोक लगा रखी है। ओबीसी अभ्यर्थियों ने पिछड़ा वर्ग को नियमानुसार आरक्षण का लाभ नहीं देने का आरोप लगाते हुए आयोग का दरवाजा खटखटाया। इस पर आयोग 7 जुलाई को शिक्षक भर्ती पर रोक लगाने का आदेश दिए थे।

विगत दिनों सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को मई में घोषित भर्ती परीक्षा के नतीजों के अनुसार सभी 69,000 पदों पर भर्ती को हरी झंडी देने के साथ ही 60 और 65 फीसद कटआफ अंक रखने को चुनौती देने वाली शिक्षामित्रों की याचिकाएं खारिज कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद शिक्षामित्रों के लिए रिक्त छोड़े गए 37,339 पदों को भरने का रास्ता साफ हो गया। हालांकि कोर्ट ने शिक्षामित्रों को अगली भर्ती में शामिल होने का एक और मौका दिया दिया । जानकारी के अनुसार 69000 सहायक अध्यापक भर्ती में 31277 पदों पर भर्ती के बाद अब बेसिक शिक्षा विभाग काउंसलिंग से पहले शेष 36590 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया जारी है।

उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया बार-बार विवादित क्यों हो जाती है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है? सरकार और विभाग की लापरवाही जिम्मेदार है। सूत्रों का कहना है कि शिक्षक भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां होती आ रही हैं। फर्जी अंकपत्रों के मामले पहले ही खुल चुके है। कुछ मामले ऐसे भी प्रकाश में आये हैं, जिसमें एक ही नाम पर कई कई लोग शिक्षक बने हुए थे। असली व्यक्ति बेरोजगार ही रह गए। कुछ माह पहले इस मामले में कुछ लोगों की गिरफ्तारियां भी हुई थी। उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

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