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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के रहने वाले कैप्टन पार्थ अधाना के लिए पिछला एक हफ्ता किसी बुरे सपने से कम नहीं था। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़े भीषण युद्ध की वजह से एयर इंडिया के यह युवा पायलट तीन रातों तक दुबई में फंसे रहे। जिस होटल में वे ठहरे थे, उसके ऊपर से गुजरती मिसाइलों और धमाकों की गूंज ने न केवल उन्हें बल्कि मेरठ में बैठे उनके परिवार को भी दहला कर रख दिया।

28 फरवरी: जब दुबई में थम गईं उड़ानें

छीपी टैंक निवासी डॉ. इंद्रेश कुमार अधाना (प्रधानाचार्य, जय किसान इंटर कालेज) के बेटे पार्थ अधाना ने एक साल पहले ही एयर इंडिया में बतौर पायलट जॉइन किया है।

मिशन: 27 फरवरी को पार्थ ने दिल्ली से लखनऊ होते हुए दुबई के लिए उड़ान भरी।

संकट: 28 फरवरी की सुबह जब वे दुबई पहुंचे, तो युद्ध के कारण हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद कर दिया गया और सभी उड़ानें रद्द हो गईं। पार्थ को मजबूरन दुबई के एक होटल में रुकना पड़ा।

मिसाइलें, ड्रोन और खौफनाक मंजर

दुबई और शारजाह के आसमान में युद्ध का असर साफ दिख रहा था। कैप्टन पार्थ ने बताया कि रात के सन्नाटे में मिसाइलों के गुजरने की आवाजें और धमाकों की गूंज साफ सुनाई दे रही थी।

"शारजाह के जिस होटल के पास क्रू मेंबर्स ठहरे थे, वहां से रात में मिसाइलें गुजरती साफ देखी जा सकती थीं। यह मंजर बेहद डरावना था।" — स्वजन

मेरठ में अधाना परिवार की 3 काली रातें

पार्थ के दुबई में फंसे होने की खबर मिलते ही मेरठ में उनके पिता डॉ. इंद्रेश, माता मीनाक्षी सिंह और चाचा (वरिष्ठ भाजपा नेता नरेश गुर्जर) की रातों की नींद उड़ गई।

संपर्क: परिवार हर आधे घंटे में फोन के जरिए पार्थ से संपर्क कर उनकी सलामती की दुआ करता रहा।

चिंता: युद्ध की खबरें और मिसाइलों के वीडियो देखकर परिवार की घबराहट बढ़ती जा रही थी।

120 क्रू मेंबर्स के साथ वतन वापसी

दो मार्च की रात करीब 12 बजे आखिरकार हालात कुछ सुधरे और भारत के लिए एक विशेष फ्लाइट का रास्ता साफ हुआ।

वापसी: कैप्टन पार्थ के साथ लगभग 120 क्रू मेंबर्स दिल्ली के लिए रवाना हुए।

घर वापसी: सोमवार रात 4 बजे दिल्ली लैंड करने के बाद, मंगलवार सुबह जब पार्थ मेरठ अपने घर पहुंचे, तो पूरे परिवार ने राहत की सांस ली।

डॉ. अधाना ने कहा कि यह भगवान का आशीर्वाद है कि उनका बेटा सुरक्षित घर लौट आया है। तीन दिन और तीन रातें बिना सोए बिताने के बाद, अब अधाना परिवार के घर में खुशियां वापस लौटी हैं।