राम मंदिर चढ़ावा चोरी: SIT का बड़ा खुलासा, अब आरोपियों के परिजनों पर भी होगी कानूनी कार्रवाई, जांच का दायरा बढ़ा

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: SIT का बड़ा खुलासा, अब आरोपियों के परिजनों पर भी होगी कानूनी कार्रवाई, जांच का दायरा बढ़ा

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले ने अब एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की सख्ती के बाद अब आरोपियों के साथ-साथ उनके परिजनों की मुश्किलें भी बढ़ने वाली हैं। पूछताछ में हुए नए खुलासों के बाद जांच एजेंसियों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि इस साजिश में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना ही रसूखदार क्यों न हो। मंदिर की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले इस मामले की जड़ें काफी गहरी पाई गई हैं।

70 बार हाथ साफ, ऐसे खुला चोरी का राज

एसआईटी की गहन जांच और आरोपियों से हुई मैराथन पूछताछ में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि पिछले 40 दिनों के भीतर दान पेटी से लगभग 70 बार चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया गया। आरोपी कर्मचारी गिनती के दौरान नोटों की गड्डी और कीमती सिक्कों को बेहद शातिर तरीके से अपने जूतों और कपड़ों में छिपाकर मंदिर परिसर से बाहर निकाल लेते थे। अब तक की जांच में 79 लाख रुपये नकद और भारी मात्रा में सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कुल गबन की राशि 3 करोड़ रुपये तक पहुँचने का अनुमान है।

परिजनों पर भी कसेगा कानून का शिकंजा

जांच का दायरा अब आरोपियों के बैंक खातों और संपत्तियों से निकलकर उनके परिवारों तक पहुँच गया है। एसआईटी को संदेह है कि चोरी की गई मोटी रकम को ठिकाने लगाने के लिए आरोपियों ने अपने रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों के खातों का इस्तेमाल किया है। अब प्रतापगढ़ स्थित आवासों की तलाशी के साथ ही परिवार के सदस्यों की बेनामी संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की स्क्रूटनी की जा रही है। अधिकारियों का साफ कहना है कि यदि चोरी की रकम में परिवार की मिलीभगत पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी कठोर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

सुरक्षा में चूक और ट्रस्ट का बड़ा एक्शन

इस मामले ने राम मंदिर के दान प्रबंधन और सुरक्षा प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि दान पेटी की निगरानी और गिनती के दौरान एसओपी (SOP) का कड़ाई से पालन नहीं किया गया, जिसका फायदा उठाकर कर्मचारियों ने इस रैकेट को खड़ा किया। अब ट्रस्ट ने भी सुरक्षा घेरे को अभेद्य बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, पिछले 5 वर्षों के सभी खातों का विशेष ऑडिट शुरू कर दिया गया है। निगरानी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो रही है, जिससे आने वाले दिनों में और भी बड़ी गिरफ्तारियां देखने को मिल सकती हैं।

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