मायावती ने पेपर लीक, बेरोजगारी और महंगी शिक्षा के मुद्दे पर जताई गहरी चिंता; सरकार से की ठोस कदम उठाने की मांग!
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जमीनी स्तर पर जुटी बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati) ने देश और प्रदेश के युवाओं से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मायावती ने लगातार हो रहे पेपर लीक (Paper Leak), बढ़ती बेरोजगारी (Unemployment) और देश में लगातार महंगी होती शिक्षा (Expensive Education) के मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त की है। सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इन बुनियादी समस्याओं के कारण करोड़ों युवाओं और उनके परिवारों का भविष्य अंधकार में डूब रहा है, जिस पर सरकार को राजनीति से ऊपर उठकर तुरंत ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
'युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद हो': बसपा सुप्रीमो का सरकार पर हमला
मायावती ने कहा कि देश में एक के बाद एक परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाओं ने पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्षों तक कठिन परिश्रम और सीमित संसाधनों में तैयारी करने वाले छात्रों का मनोबल इससे पूरी तरह टूट जाता है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ महज दिखावे की कार्रवाई करने के बजाय ऐसी फुलप्रूफ व्यवस्था बनाई जाए जिससे दोबारा किसी भी परीक्षा की शुचिता भंग न हो सके।
महंगी शिक्षा और बेरोजगारी पर उठाए तीखे सवाल
अपने आधिकारिक बयान में बसपा प्रमुख ने शिक्षा के बढ़ते बाजारीकरण और निजीकरण पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आज के दौर में उच्च और तकनीकी शिक्षा आम और गरीब परिवार के बच्चों की पहुंच से बाहर होती जा रही है।
युवाओं के संकट को रेखांकित करते हुए मायावती ने मुख्य रूप से 3 बड़ी चिंताओं को सामने रखा है:
1.महंगी होती शिक्षा और फीस वृद्धि:मुद्दा 1.
सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में लगातार बढ़ती फीस के कारण गरीब, दलित, पिछड़े और मध्यम वर्गीय परिवारों के होनहार छात्र उच्च शिक्षा से वंचित हो रहे हैं, जो एक कल्याणकारी सरकार की नीतियों के खिलाफ है।
2.भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और भ्रष्टाचार:मुद्दा 2.
एक तो सरकारी विभागों में लाखों पद खाली पड़े हैं, और जो भर्तियां निकलती भी हैं, वे या तो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती हैं या फिर सालों तक कोर्ट-कचहरी के चक्करों में लटकी रहती हैं।
3.बढ़ती बेरोजगारी का संकट:मुद्दा 3.
डिग्री हाथ में होने के बावजूद युवाओं को योग्यता के अनुसार रोजगार नहीं मिल रहा है। रोजगार के अभाव में युवा वर्ग में हताशा और अवसाद की भावना बढ़ रही है, जो देश के भविष्य के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।
'भटकाने वाली राजनीति छोड़ युवाओं को रोजगार दे सरकार'
मायावती ने केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों को नसीहत देते हुए कहा कि केवल बड़े-बड़े दावों और विज्ञापनों से युवाओं का पेट नहीं भरने वाला। सरकारों को अपनी प्राथमिकताओं में सुधार करना होगा। उन्होंने मांग की कि रिक्त पड़े सभी सरकारी पदों पर पारदर्शी तरीके से तुरंत स्थाई भर्तियां शुरू की जाएं और शिक्षा को हर वर्ग के लिए सुलभ व किफायती बनाया जाए ताकि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के शिक्षित और सशक्त भारत के सपने को सच किया जा सके।
राजनीतिक गलियारों में मायावती के इस रुख को 'मिशन 2027' से पहले युवा मतदाताओं (Youth Vote Bank) को बीएसपी के पाले में लाने की एक मजबूत और रणनीतिक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।