लखनऊ : लिंक एक्सप्रेसवे बनते ही सिर्फ 25 मिनट में तय होगा 2 घंटे का लंबा सफर
उत्तर प्रदेश के सड़क परिवहन और बुनियादी ढांचे के विकास में एक और नया और क्रांतिकारी अध्याय जुड़ने जा रहा है, जो राज्य के लाखों वाहन चालकों और यात्रियों के लिए किसी बड़े वरदान से कम साबित नहीं होगा। अक्सर लखनऊ शहर के भीतर से गुजरने के दौरान लगने वाले भीषण जाम, भारी ट्रैफिक और सिग्नल की पाबंदियों के कारण यात्रियों के कीमती घंटों का नुकसान होता था। इस गंभीर समस्या से हमेशा के लिए निजात दिलाने के लिए राज्य सरकार और यूपीडा (UPEIDA) द्वारा एक नए लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इस आधुनिक लिंक एक्सप्रेसवे के पूरी तरह से तैयार हो जाने के बाद वाहन चालकों को अब लखनऊ शहर के अंदर प्रवेश करने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ेगी, बल्कि वे बाईपास के जरिए ही सिर्फ 25 मिनट के भीतर अपने दो घंटे के लंबे सफर को पार करके सीधे पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर फर्राटा भर सकेंगे।
लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण से महानगर के ट्रैफिक जाम से मिलेगी मुक्ति
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पिछले कुछ वर्षों में वाहनों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है, जिसके कारण शहर के प्रमुख चौराहों और आउटर रिंग रोड पर रोजाना पीक आवर्स के दौरान लंबा ट्रैफिक जाम देखने को मिलता है। जो यात्री कानपुर, आगरा या दिल्ली की तरफ से आकर पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की ओर जाना चाहते थे, उन्हें मजबूरी में लखनऊ शहर के अंदरूनी रास्तों या संकरे बाईपास से होकर गुजरना पड़ता था। इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम दो घंटे का अतिरिक्त समय बर्बाद होता था और ईंधन की खपत भी बहुत ज्यादा होती थी। जनता की इस परेशानी को ध्यान में रखते हुए अब एक ऐसा हाई-स्पीड लिंक एक्सप्रेसवे तैयार किया जा रहा है जो शहर के बाहर से ही ट्रैफिक को सीधे कनेक्ट कर देगा। इस रूट के शुरू होने से महानगर के भीतर भारी कमर्शियल वाहनों और बाहरी गाड़ियों का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों को भी जाम से बड़ी राहत मिलेगी।
सिर्फ 25 मिनट में तय होगी दूरी, समय और ईंधन की होगी भारी बचत
समय किसी भी इंसान के जीवन में सबसे कीमती संसाधन होता है, और सड़क परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य ही लोगों के सफर के समय को कम करना होता है। नया लिंक एक्सप्रेसवे चालू होने के बाद जो सफर तय करने में पहले शहर के ट्रैफिक की वजह से लगभग दो घंटे का समय लग जाता था, वह अब घटकर मात्र 25 मिनट रह जाएगा। यह अत्याधुनिक एक्सप्रेस-वे उच्च गुणवत्ता वाली तकनीक से बनाया जा रहा है, जिस पर वाहन एक निश्चित और तेज गति से बिना किसी बाधा के दौड़ सकेंगे। सफर का समय कम होने से न केवल यात्रियों की शारीरिक थकान बचेगी, बल्कि गाड़ियों के ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की खपत में भी भारी कमी आएगी, जिससे पर्यावरण को भी फायदा पहुंचेगा। व्यापारिक और औद्योगिक दृष्टि से भी माल ढुलाई करने वाले ट्रकों और कमर्शियल वाहनों के लिए यह रास्ता बेहद सुगम और किफायती साबित होने वाला है।
सीधे पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा नया रूट, बिना रुके तय होगा लंबा सफर
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश की धुरी माना जाता है जो राज्य के पूर्वी जिलों को राजधानी लखनऊ और देश की राजधानी दिल्ली से जोड़ने का सबसे बड़ा जरिया है। इस नए लिंक एक्सप्रेस-वे के जरिए अब यात्रियों को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर चढ़ने के लिए लखनऊ के भीतर चक्कर काटने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी। एक्सप्रेस-वे का यह नया नेटवर्क इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यह सीधे तौर पर पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के शुरुआती छोर और आउटर रिंग रोड को आपस में जोड़ देगा। परिणामस्वरूप, जो लोग सुल्तानपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ या बलिया की तरफ यात्रा करना चाहते हैं, वे बिना किसी लाल बत्ती या ट्रैफिक सिग्नल के सीधे हाई-स्पीड कॉरिडोर के माध्यम से अपने गंतव्य की ओर निकल जाएंगे। उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी का यह नया जाल राज्य के आर्थिक विकास और परिवहन व्यवस्था को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का पूरा दम रखता है।
उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेस-वे के जाल से बदल रही है सफर की तस्वीर
पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश को 'एक्सप्रेस-वे प्रदेश' के रूप में एक नई पहचान मिली है, जहां देश के सबसे बेहतरीन और लंबे एक्सप्रेस-वे नेटवर्क का निर्माण किया गया है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे और गंगा एक्सप्रेस-वे जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के बाद अब इस तरह के छोटे और प्रभावी लिंक एक्सप्रेस-वे की श्रृंखला तैयार की जा रही है ताकि हर एक जिले और शहर को मुख्य मार्गों से निर्बाध रूप से जोड़ा जा सके। सरकार की इस दूरदर्शी सोच से न केवल यात्रा का अनुभव पूरी तरह से बदल गया है, बल्कि लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी जबरदस्त बढ़ावा मिला है। लखनऊ के आसपास बन रहा यह नया लिंक एक्सप्रेस-वे इसी आधुनिक विकास यात्रा का एक और चमकदार उदाहरण है, जो जल्द ही आम जनता को समर्पित कर दिया जाएगा।