RPF की दबंगई! आगरा में स्टेशन मास्टर को प्लेटफॉर्म पर घसीटा, मुरादाबाद में काली पट्टी बांधकर रेलवे स्टाफ का फूटा गुस्सा
उत्तर प्रदेश के आगरा से रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की घोर दबंगई और हैवानियत की एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसकी गूंज अब पूरे सूबे के रेलवे महकमे में सुनाई दे रही है। आगरा में आरपीएफ के जवानों ने ऑन-ड्यूटी स्टेशन मास्टर के साथ न सिर्फ बदसलूकी की, बल्कि उन्हें बेरहमी से पीटते हुए प्लेटफॉर्म पर घसीट डाला। इस शर्मनाक घटना के विरोध में मुरादाबाद रेलवे स्टेशन (Moradabad Railway Station) पर रेलवे कर्मचारियों और यूनियनों का भारी गुस्सा फूट पड़ा है। मुरादाबाद में स्टेशन मास्टर और अन्य रेल कर्मियों ने अपनी बांहों पर काली पट्टी बांधकर आरपीएफ के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन दर्ज कराया है।
मामूली बात पर रक्षक ही बने भक्षक, केबिन में घुसकर किया हमला
यह पूरी घटना आगरा रेल मंडल के एक स्टेशन की बताई जा रही है, जहां किसी विभागीय बात या मामूली कहासुनी को लेकर आरपीएफ के जवान आपा खो बैठे। प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित के अनुसार, जवान जबरन स्टेशन मास्टर के केबिन (Control Room) में घुस आए और उनके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। जब स्टेशन मास्टर ने इसका विरोध किया, तो जवानों ने अपनी वर्दी की हनक दिखाते हुए उन पर लात-घूंसों से हमला कर दिया। हद तो तब हो गई जब स्टेशन मास्टर को घसीटते हुए प्लेटफॉर्म तक लाया गया, जिससे वहां मौजूद यात्रियों में भी अफरा-तफरी मच गई।
मुरादाबाद रेल मंडल में सुरक्षा बल के खिलाफ लामबंदी
जैसे ही इस बर्बरता की खबर मुरादाबाद रेल मंडल के कर्मचारियों तक पहुंची, वहां का माहौल पूरी तरह गरमा गया। ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन (AISMA) और अन्य प्रमुख रेलवे यूनियनों ने तुरंत एक आपात बैठक बुलाई। मुरादाबाद स्टेशन पर तैनात सभी स्टेशन मास्टर्स, सहायक स्टेशन मास्टर्स और ऑपरेटिंग स्टाफ ने अपनी ड्यूटी के दौरान बांहों पर काली पट्टी बांधी। कर्मचारियों का साफ कहना है कि अगर देश की लाइफलाइन चलाने वाले रेल कर्मियों के साथ ही रेलवे परिसर के भीतर ऐसी हैवानियत होगी, तो वे सुरक्षित माहौल में काम कैसे कर पाएंगे।
उच्च स्तरीय जांच और आरपीएफ जवानों को सस्पेंड करने की मांग
मुरादाबाद में हुए इस विरोध प्रदर्शन के जरिए रेल कर्मियों ने रेलवे बोर्ड और मंडल रेल प्रबंधक (DRM) को एक कड़ा संदेश भेजा है। यूनियनों ने मांग की है कि आगरा की घटना में शामिल सभी दोषी आरपीएफ जवानों को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड (Suspend) किया जाए और उनके खिलाफ आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाए। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने २४ घंटे के भीतर दोषियों पर सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं की, तो यह विरोध प्रदर्शन उग्र रूप ले सकता है और ट्रेन संचालन (Train Operations) पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है।