एसिड अटैक पीड़िताओं का सहारा बनी योगी सरकार, 10 लाख की मदद, मुफ्त इलाज के साथ मिलेगा आवास
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने महिला सुरक्षा, सशक्तीकरण और पुनर्वास की दिशा में एक और ऐतिहासिक और संवेदनशील कदम उठाया है। राज्य सरकार ने एसिड अटैक (तेजाब हमला) पीड़िताओं के लिए एक व्यापक सहायता और पुनर्वास नीति लागू की है, जिसके तहत उन्हें आर्थिक तंगी और सामाजिक असुरक्षा से उबारने के लिए कई बड़े तोहफे दिए जा रहे हैं। इस नीति के तहत पीड़िताओं को वित्तीय मुआवजे से लेकर मुफ्त इलाज, पक्का मकान और बेहतर जीवन जीने की पूरी गारंटी दी जा रही है।
10 लाख तक की आर्थिक मदद और क्षतिपूर्ति
तेजाब हमले की दर्दनाक त्रासदी झेलने वाली महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए सरकार की ओर से व्यापक प्रावधान किए गए हैं। नियमों के तहत पीड़िताओं को इलाज और जीवनयापन में मदद के रूप में 10 लाख रुपये तक की क्षतिपूर्ति राशि और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि वे इस भयानक सदमे से उबरकर आर्थिक रूप से खुद को संभाल सकें।
छह मेडिकल कॉलेजों में बनेंगे 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस'
एसिड अटैक पीड़िताओं को बार-बार होने वाली जटिल सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी और लंबी चिकित्सा प्रक्रियाओं की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश के 6 प्रमुख मेडिकल कॉलेजों को विशेष रूप से 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां इन पीड़िताओं का पूरा इलाज पूरी तरह से मुफ्त और उच्च स्तर पर किया जाएगा। इसके अलावा, इन्हें आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से भी जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें और उनके परिवार को स्वास्थ्य सुरक्षा कवच मिल सके।
पक्के आवास की सुविधा और सामाजिक सुरक्षा
कई बार तेजाब हमले या अन्य पारिवारिक-सामाजिक संकटों के बाद महिलाओं के सामने सिर छिपाने का संकट खड़ा हो जाता है। इसे दूर करने के लिए योगी सरकार ने इन पीड़िताओं को प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत प्राथमिकता के आधार पर पक्का मकान उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। जिन महिलाओं के पास अपना खुद का स्थायी आवास नहीं है, उन्हें इन आवास योजनाओं के दायरे में लाया जा रहा है ताकि वे सम्मान के साथ जीवन व्यतीत कर सकें।
शिक्षा, रोजगार और गरिमापूर्ण जीवन की गारंटी
सरकार की इस पुनर्वास नीति का मुख्य उद्देश्य केवल तात्कालिक सहायता देना नहीं, बल्कि पीड़िताओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके तहत पीड़िताओं को शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की भी पूरी व्यवस्था की जा रही है, जिससे वे आत्मनिर्भर बनकर एक सुरक्षित और गरिमापूर्ण भविष्य का निर्माण कर सकें। महिला कल्याण विभाग को इस पूरी प्रक्रिया का नोडल विभाग बनाया गया है, जो यह सुनिश्चित कर रहा है कि हर पात्र पीड़िता तक इन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी अड़चन के पहुंचे।