Uttarakhand Power Shift: धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा का बढ़ा प्रशासनिक कद, अब मंत्रियों के बड़े प्रोजेक्ट्स की रिपोर्ट करेंगे रिव्यू
उत्तराखंड की सियासत और शासन व्यवस्था के गलियारों में इस समय एक नए आदेश को लेकर जबरदस्त हलचल मची हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के एक ताजा और अप्रत्याशित फैसले ने प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी से लेकर कैबिनेट तक के समीकरणों को गरमा दिया है। सूबे के कई कद्दावर और बेहद सीनियर मंत्रियों की मौजूदगी के बीच, युवा कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा का प्रशासनिक और राजनीतिक कद अचानक काफी बड़ा कर दिया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा जारी एक विशेष आदेश के तहत अब प्रदेश के सभी मंत्रियों और विभागों के बड़े बजट वाली फाइलों व परियोजनाओं की समीक्षा का जिम्मा सौरभ बहुगुणा को सौंप दिया गया है, जिसे लेकर कयासों का बाजार बेहद गर्म है।
जानिए मुख्यमंत्री कार्यालय के उस आदेश में क्या है, जिसने बढ़ाई हलचल
मुख्यमंत्री के प्रमुख निजी सचिव भूपेंद्र सिंह बसेड़ा की ओर से सभी मंत्रियों के निजी सचिवों के नाम एक आधिकारिक पत्र जारी किया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत, प्रदेश के विभिन्न विभागों में गतिमान ₹5 करोड़ या इससे अधिक के बजट की सभी जनहित और विकास योजनाओं का पूरा विवरण और ब्रीफ नोट बनाकर सबसे पहले कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा के पास भेजना अनिवार्य कर दिया गया है। इस रिपोर्ट की एक प्रति मुख्यमंत्री कार्यालय को भी उपलब्ध कराई जाएगी। रणनीतिक जानकारों के मुताबिक, जब तक इस ब्रीफ नोट पर सौरभ बहुगुणा की प्रक्रिया और समीक्षा पूरी नहीं होगी, तब तक बजट स्वीकृति की फाइलें आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा।
कद्दावर और सीनियर मंत्रियों के बीच युवा चेहरे को कमान, 'सेकंड पावर सेंटर' की चर्चा
उत्तराखंड कैबिनेट में सतपाल महाराज, प्रेमचंद अग्रवाल और गणेश जोशी जैसे कई कद्दावर व अनुभवी राजनेता शामिल हैं। ऐसे में एक युवा मंत्री को इतनी बड़ी और व्यापक प्रशासनिक पावर दिए जाने के बाद से ही राजनीतिक पंडित इसे सरकार के भीतर एक 'सेकंड पावर सेंटर' के उभरने के रूप में देख रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए हाईकमान और मुख्यमंत्री धामी ने कुमाऊं क्षेत्र को सरकार के भीतर एक और अधिक मजबूत तथा आक्रामक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में यह बड़ा दांव खेला है।
सरकार की सफाई: जनहित के कार्यों में तेजी लाने के लिए बनाई गई व्यवस्था
एक तरफ जहां विपक्षी दल कांग्रेस इस फैसले को लेकर सरकार के भीतर आपसी अविश्वास और अंतर्विरोध का मुद्दा बनाकर निशाना साध रही है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री कार्यालय और सरकार से जुड़े सूत्रों ने स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय का कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य जनहित और विकास के कार्यों की मॉनिटरिंग को बेहतर करना है। इस व्यवस्था से बड़े बजट की योजनाओं में पारदर्शिता आएगी और उन्हें तय समय-सीमा के भीतर धरातल पर उतारा जा सकेगा। वजह चाहे जो भी हो, लेकिन इस आदेश ने उत्तराखंड की राजनीति की तपिश को कई गुना जरूर बढ़ा दिया है।