West Bengal elections : कमजोर पड़ा BJP का हिंदुत्व कार्ड, दीदी बनी बंगाली अस्मिता की प्रतीक

TMC पश्चिम बंगाल में दस साल से सत्ता में है। ऐसे में लोगों का ममता सरकार से नाराज होना स्वाभाविक है। BJP ने विकास और तुष्टीकरण का मुद्दा उठाकर अपने पक्ष में माहौल तैयार किया था।

Political desk 

West Bengal में भारतीय जनता पार्टी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। टिकट वितरण को लेकर पार्टी कार्यकर्ता लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ का कहना कि एक महीना पहले BJP के पक्ष में जो माहौल था, वह काफूर हो चुका है। चुनाव की तारीखें करीब आने के साथ ही हिंदुत्व कार्ड भी कमजोर पड़ता जा रहा है। अब तो हिंदुत्व के बजाय बंगाली अस्मिता पर चर्चा होने लगी है।

TMC पश्चिम बंगाल में दस साल से सत्ता में है। ऐसे में लोगों का ममता सरकार से नाराज होना स्वाभाविक है। BJP ने विकास और तुष्टीकरण का मुद्दा उठाकर अपने पक्ष में माहौल तैयार किया था। लेकिन टिकट वितरण में कार्यकर्ताओं की अनदेखी और बाहरियों को तवज्जो देने से पार्टी संगठन में भूचाल आ गया। भजपा के रणनीतिकार टिकट वितरण में पार्टी कैडर और दूसरे दलों से आये नेताओं के बीच तालमेल नहीं बैठा पाए। BJP आलाकमान जमीनी हकीकत से दूर सिर्फ ममता बनर्जी पर हमलावर रही।

BJP द्वारा उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी करते ही कार्यकर्ता आप से बाहर होने लगे। कार्यकर्ताओं ने पार्टी पर जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए मालदा, जलपाईगुड़ी, मुर्शिदाबाद, उत्तर 24 परगना सहित कई जगहों पर हिंसक विरोध-प्रदर्शन किया और पार्टी के झंडे व बैनर फाड़ डाले। युवा BJP नेता सौरव सिकदर ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया।

BJP ने शिखा मित्रा को चौरंगी और तरुण साहा को काशीपुर बेलगछिया से टिकट दिया, लेकिन दोनों नेताओं ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने से साफ इंकार कर दिया। शिखा मित्रा ने कहा कि BJP ने अपना दिमाग खो दिया है, लग रहा है कि उसके पास पर्याप्त उम्मीदवार नहीं हैं। इसी तरह साहा ने कहा है कि वह TMC के साथ हैं और उसी के साथ रहेंगे।

इसी तरह चुनाव की तारीखें नजदीक आने के साथ बंगाल में बीजेपी का हिदुत्व भी कमजोर पड़ चुका है। अब तो ध्रुवीकरण के बजाय बंगाली अस्मिता पर चर्चा होने लगी है। BJP के रणनीतिकार बंगाली राजनीति को नहीं समझ पा रहे हैं। चोट लगने के बाद ममता बनर्जी व्हीलचेयर पर प्रचार कर रही हैं। इससे उनके प्रति आम लोगों में सहानुभूति है। माहौल को देखते हुए BJP नेताओं के तेवर भी कुंद पड़ने लगे हैं।

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