PoK चुनाव के पहले ही चरण में खूनी संग्राम, बैलेट बॉक्स फूंके; लोकतंत्र के नाम पर सिर्फ दिखावा?
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में कथित विधानसभा चुनाव के पहले ही चरण में भयंकर चुनावी हिंसा और धांधली का मामला सामने आया है। मतदान के दौरान राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच खूनी झड़पें हुईं, जिसमें एक पार्टी कार्यकर्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं। इतना ही नहीं, कुछ इलाकों में उग्र भीड़ ने बैलेट बॉक्स लूट लिए और मतपत्रों को आग के हवाले कर दिया। इस भारी बवाल के बाद PoK की इस तथाकथित चुनावी प्रक्रिया की साख पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
कार्यकर्ता की सरेआम हत्या और बिलावल भुट्टो का गुस्सा
घटना मीरपुर मंडल के कोटली जिले की है, जहां पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (PML-N) के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक टकराव हो गया। PPP का आरोप है कि उसके 35 वर्षीय कार्यकर्ता मुख्तार यूनुस की PML-N उम्मीदवार के समर्थकों ने अंधाधुंध फायरिंग कर हत्या कर दी। इस घटना के बाद PPP अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने पाकिस्तानी प्रशासन और वहां के चुनाव आयोग को आड़े हाथों लेते हुए पूछा, "अधिकारी कहां सो रहे हैं और चुनाव आयोग क्या कर रहा है?"
बैलेट बॉक्स लूटे, मतपत्रों को लगाई आग
हिंसा सिर्फ फायरिंग तक ही सीमित नहीं रही। भिंबर जिले के समाहनी इलाके में इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान पार्टी (IPP) के समर्थकों पर मतदान केंद्र से बैलेट बॉक्स लूटने और मतपत्रों में आग लगाने का आरोप लगा है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में हथियारबंद लोग सरेआम हंगामा करते दिखे, जिसके बाद पुलिस ने करीब 30 लोगों को हिरासत में लिया है। कई संवेदनशील पोलिंग बूथों पर बवाल के चलते मतदान को बीच में ही रोकना पड़ा।
आखिर पूरी चुनावी प्रक्रिया पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
PoK में चल रहे इस तीन चरणों के चुनाव (27 जुलाई से 10 अगस्त) पर सवाल उठने की कई बड़ी वजहें हैं:
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प्रमुख दलों द्वारा पूर्ण बहिष्कार: पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पीटीआई (PTI) ने इन चुनावों का पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया है। इसके अलावा स्थानीय जनता का प्रतिनिधित्व करने वाली 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) ने भी चुनावों को खारिज कर दिया है, जिससे पोलिंग बूथ बिल्कुल खाली नजर आए।
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पाकिस्तानी सेना का सीधा दखल: स्थानीय लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों का आरोप है कि यह चुनाव महज एक दिखावा है। पाकिस्तानी सेना के प्रमुख असीम मुनीर ने पहले ही तय कर लिया है कि सत्ता में किसे बिठाना है, ताकि क्षेत्र में उठने वाले जन-आंदोलनों को कुचला जा सके।
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जनता में भारी आक्रोश और दमन: पिछले कई महीनों से PoK की जनता बुनियादी अधिकारों, बिजली-आटे के संकट और प्रशासनिक दमन के खिलाफ सड़कों पर है। पिछली हिंसा में 100 से अधिक स्थानीय नागरिकों के मारे जाने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में जनता का इस थोपे गए चुनाव से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है।
भारत हमेशा से यह स्टैंड रखता आया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा हिस्सा भारत का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान ने इस पर अवैध कब्जा कर रखा है। वर्तमान हालात दिखाते हैं कि पाकिस्तान इस क्षेत्र में न तो कानून व्यवस्था संभाल पा रहा है और न ही लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान कर रहा है।