अमेरिका में माता-पिता को बुलाना हुआ बेहद मुश्किल: NRI ने बयां किया दर्द, 5 महीने के बजाय सिर्फ 2 महीने की मिली अनुमति
विदेशों में खासकर अमेरिका में बस चुके लाखों भारतीय मूल के नागरिकों और नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRI) के लिए अपने बुजुर्ग माता-पिता को अपने पास बुलाना अब किसी लोहे के चने चबाने से कम नहीं रह गया है। हाल ही में सोशल मीडिया और विभिन्न अप्रवासी मंचों पर एक एनआरआई द्वारा अपनी आपबीती साझा करने के बाद यह मुद्दा फिर से वैश्विक स्तर पर सुर्खियों में आ गया है, जिसने हर उस परिवार की चिंता बढ़ा दी है जो अपने वृद्ध मां-बाप को कुछ समय के लिए अमेरिका बुलाने का सपना देखता है। आमतौर पर जब कोई भारतीय परिवार अमेरिका में टूरिस्ट या विजिटर वीजा (B2 Visa) के जरिए अपने माता-पिता को आमंत्रित करता है, तो उन्हें अमेरिका में प्रवेश के समय अमूमन छह महीने तक रुकने की अनुमति मिलती थी, ताकि वे अपने बच्चों और पोते-पोतियों के साथ समय बिता सकें। लेकिन हालिया कुछ महीनों में अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (USCIS और CBP) अधिकारियों के रुख में आए भारी बदलाव के कारण स्थिति बिल्कुल उलट चुकी है। अब एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों द्वारा नियमों की पेचीदगियों का हवाला देते हुए पांच महीने या छह महीने के बजाय मात्र दो महीने की ही अधिकतम अवधि (Duration of Stay) अप्रूव की जा रही है, जिससे एनआरआई परिवारों के बीच अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया है और वे अपनी भविष्य की योजनाओं को लेकर असमंजस में हैं।
वीज़ा मिलने के बावजूद एयरपोर्ट पर बढ़ रही है NRI परिवारों की मुश्किलें
विदेशी धरती पर अपनी कड़ी मेहनत के दम पर सफलता का मुकाम हासिल करने वाले एनआरआई जब अपनों को अपने पास बुलाते हैं, तो उनकी सबसे बड़ी खुशी माता-पिता के साथ कुछ हसीन पल बिताना होती है। लेकिन हाल ही में अमेरिका पहुंचे कई बुजुर्ग माता-पिता के साथ एयरपोर्ट पर जो अनुभव हुआ, उसने सभी को सकते में डाल दिया है। अमेरिकी दूतावास से 10 साल का वैध टूरिस्ट वीजा और तमाम दस्तावेजों को पूरा करने के बावजूद जब बुजुर्ग माता-पिता जॉन एफ कैनेडी या किसी अन्य अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उतरे, तो इमिग्रेशन काउंटर पर बैठे अधिकारियों ने उनके प्रवेश की अनुमति को केवल 60 दिन यानी दो महीने तक ही सीमित कर दिया। उस एनआरआई ने अपनी दर्द भरी दास्तां साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अपने बुजुर्ग माता-पिता के आने-जाने के टिकट इस हिसाब سے बुक किए थे कि वे कम से कम चार से पांच महीने अमेरिका में रहकर अपनी बेटी की डिलीवरी या पारिवारिक आयोजनों में साथ दे सकें, लेकिन इमिग्रेशन ऑफिसर के एक छोटे से फैसले ने उनके सारे गणित को बिगाड़ कर रख दिया। अब उनके सामने यह गंभीर संकट खड़ा हो गया है कि यदि वे तय समय से अधिक रुकते हैं, तो वह अमेरिकी आव्रजन कानूनों का उल्लंघन बन जाएगा, जिसका खामियाजा भविष्य में आजीवन वीजा बैन के रूप में भुगतना पड़ सकता है।
क्या है अमेरिकी इमिग्रेशन नीतियों में इस अचानक आए कड़े बदलाव के पीछे की मुख्य वजह?
अमेरिका की आव्रजन नीतियां हमेशा से अपनी कठोरता के लिए जानी जाती रही हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से विजिटर वीजाधारकों के प्रति अधिकारियों का रवैया और अधिक संदेहास्पद और सख्त हो गया है। जानकारों और आव्रजन वकीलों का मानना है कि इसके पीछे कई आंतरिक प्रशासनिक कारण जुड़े हुए हैं, जिनमें टूरिस्ट वीजा का दुरुपयोग करके लंबे समय तक अमेरिका में अवैध रूप से रहने या चुपचाप काम करने वाले लोगों की बढ़ती संख्या शामिल है। अमेरिकी सीमा सुरक्षा एजेंसियों का यह मानना है कि विजिटर वीजा मूल रूप से पर्यटन, अल्पकालिक छुट्टियों या थोड़े समय के लिए परिवार से मिलने का माध्यम है, न कि अमेरिका में महीनों तक डेरा डालकर रहने का विकल्प। जब इमिग्रेशन अधिकारी एयरपोर्ट पर बुजुर्ग यात्रियों से उनके ठहरने की अवधि, स्पॉन्सर के दस्तावेज और वापसी के टिकट के बारे में पूछताछ करते हैं, और उन्हें जरा भी यह अंदेशा होता है कि यात्री तय अवधि से ज्यादा रुक सकता है या अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका में बसने की नीयत रखता है, तो वे अपनी मनमर्जी से प्रवास की अवधि को घटाकर सीधे दो महीने या उससे भी कम कर देते हैं। इस मनमाने और गैर-पारदर्शी रवैये के कारण वैध तरीके से कागजात लेकर आने वाले मासूम बुजुर्गों को भारी मानसिक प्रताड़ना और अपमान का सामना करना पड़ता है।
परिवारिक और भावनात्मक ताने-बाने पर पड़ रहा है इस कड़ाई का गहरा नकारात्मक असर
अमेरिका जैसे विकसित देश में दिन-रात कॉर्पोरेट की दौड़भाग और व्यस्त जीवनशैली के बीच जीने वाले एनआरआई परिवार अपने माता-पिता के आगमन को अपने जीवन का सबसे सुकून भरा समय मानते हैं। जब बुजुर्ग माता-पिता हजारों मील की हवाई यात्रा तय करके अपने बच्चों के पास पहुंचते हैं, तो उन्हें उम्मीद होती है कि वे अपने पोते-पोतियों के साथ कुछ महीने शांति से बिता सकेंगे और इस दौरान परिवार को एक मजबूत भावनात्मक संबल मिलेगा। लेकिन केवल दो महीने की अनुमति मिलने के कारण बुजुर्गों को जेट लैग (Jet Lag) और स्वास्थ्य संबंधी प्राथमिक परेशानियों से उबरने से पहले ही वापसी की टिकट की चिंता सताने लगती है। इतने कम समय के लिए इतनी लंबी और महंगी यात्रा करना न केवल बुजुर्गों के शारीरिक स्वास्थ्य के लिए थका देने वाला होता है, बल्कि यह आर्थिक रूप से भी परिवारों पर बहुत बड़ा बोझ साबित होता है। इस अनिश्चितता के कारण अब कई एनआरआई परिवारों ने अपने माता-पिता को अमेरिका बुलाने का विचार ही त्यागना शुरू कर दिया है, जिससे परिवारों के बीच की दूरियां और अधिक बढ़ने लगी हैं।
इस गंभीर संकट से निपटने के लिए एनआरआई समुदाय और वकीलों की क्या है सलाह?
इस प्रकार की बढ़ती हुई घटनाओं को देखते हुए अमेरिका में रह रहे प्रवासी भारतीयों और कम्युनिटी संगठनों ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है और आपस में अनुभव साझा करने शुरू कर दिए हैं। आव्रजन मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारी प्रवास की अवधि कम भी कर देते हैं, तो कानून के दायरे में रहकर 'एक्सटेंशन ऑफ स्टे' (Form I-539) के जरिए समय रहते आवेदन करके अवधि बढ़ाई जा सकती है, हालांकि इसमें कई बार लंबा वक्त और अतिरिक्त खर्च लग जाता है। वकीलों की सलाह है कि जब भी बुजुर्ग माता-पिता अमेरिका की यात्रा करें, तो उनके पास रिटर्न टिकट, स्पॉन्सर के वित्तीय दस्तावेज, और एक स्पष्ट ट्रेवल इटियरी (Travel Itinerary) लिखित रूप में होनी चाहिए ताकि वे इमिग्रेशन अधिकारियों को यह भरोसा दिला सकें कि वे निर्धारित समय पर अपने देश लौट जाएंगे। इसके बावजूद, यह स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि अमेरिकी वीजा प्रणाली में पारदर्शिता की भारी कमी है और अप्रवासी समुदायों को अपनी आवाज बुलंद करने की आवश्यकता है ताकि इस तरह की अमानवीय पाबंदियों से बचा जा सके।