वाह रे! योगी की पुलिस: दबंगों से यारी, दलितों पर भारी

राज्य सचिव सुधाकर यादव ने सोमवार को बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार किसी भी राज्य की तुलना में सबसे ज्यादा दलित और मुस्लिम UP की जेलों में बंद हैं।

उत्तर प्रदेश।। राज्य इकाई ने रायबरेली के लालगंज में हिरासत में दलित युवक की मौत पर कहा है कि मुख्यमंत्री योगी की पुलिस का मानवाधिकार और कानून की धज्जियां उड़ाने में सानी नहीं है। पार्टी ने मामले की न्यायिक जांच कर सभी दोषी पुलिस वालों को कड़ी सजा, पीड़ित परिवार को 50 लाख रु0 मुआवजा व एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है।

राज्य सचिव सुधाकर यादव ने सोमवार को बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार किसी भी राज्य की तुलना में सबसे ज्यादा दलित और मुस्लिम UP की जेलों में बंद हैं। यह दलितों व मुस्लिमों के प्रति सिस्टम और पुलिस के पूर्वाग्रह से ग्रसित होने का अपने आप में एक अकाट्य प्रमाण है। यही कारण है कि जब मामला दलितों के खिलाफ आरोप का होता है, तो पुलिस कानून की आड़ में बर्बरता की हद तक पार कर जाती है, मगर जब मामला दलितों पर जुल्म व दबंगई का होता है, तो कार्रवाई शायद ही होती है।

राज्य सचिव ने कहा कि रायबरेली मामले में परिजनों का स्पष्ट रूप से कहना है कि युवक मोहित उर्फ मोनू (21) की मौत हिरासत में पुलिस की पिटाई से हुई। यह भी आरोप है कि बाइक चोरी के आरोप में पकड़कर थाने लाये गए युवक को अपनी जान इसलिए गंवानी पड़ी, क्योंकि रिहाई के एवज में वह पैसों का बंदोबस्त नहीं कर सका। माले नेता ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से भी रायबरेली की घटना को स्वतः संज्ञान में लेकर पीड़ित के परिवार को त्वरित न्याय दिलाने की अपील की।

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