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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल श्री हेमकुंड साहिब में इस बार आस्था की राह आसान नहीं होने वाली है। धाम के कपाट खुलने की तारीख 23 मई 2026 तय की गई है, लेकिन वर्तमान में वहां कुदरत का पहरा है। पूरे धाम परिसर और पैदल मार्ग पर 8 फीट से अधिक मोटी बर्फ की चादर बिछी हुई है, जिसे साफ करना भारतीय सेना और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।

सेना के दल ने बर्फ के बीच तय किया 6 किमी का दुर्गम सफर

हेमकुंड साहिब में बर्फ की स्थिति का जायजा लेने के लिए भारतीय सेना का एक तीन सदस्यीय दल और गुरुद्वारे के चार सेवादार रविवार को धाम पहुंचे। इस दल को घांघरिया से हेमकुंड साहिब तक का 6 किमी का सफर पूरी तरह बर्फ पर चलकर तय करना पड़ा। रविवार सुबह मौसम साफ होने पर यह दल छोटी अटलाकोटी होते हुए मुख्य गुरुद्वारे तक पहुंचा। हालांकि, शाम को वापस लौटते समय धाम में फिर से ताजा बर्फबारी शुरू हो गई, जिससे मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

अटलाकोटी में 10 फीट ऊंचे हिमखंड: एक दशक बाद ऐसा नजारा

गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के सीईओ सरदार सेवा सिंह ने बताया कि इस साल बर्फबारी ने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

अटलाकोटी क्षेत्र: यहां 8 फीट से ऊंचे विशाल हिमखंड (Glaciers) पसरे हुए हैं।

छोटी अटलाकोटी: यहां लगभग एक दशक बाद 10 फीट से ऊंचा हिमखंड देखने को मिल रहा है, जो यात्रा मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध किए हुए है।

धाम परिसर: पवित्र सरोवर, लंगर हॉल और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर अभी भी पूरी तरह बर्फ की आगोश में हैं।

वैशाखी के बाद शुरू होगा 'बर्फ हटाओ' अभियान

ताजा बर्फबारी के कारण बेस कैंप घांघरिया में भी एक फीट से अधिक बर्फ जमा है। सेना और ट्रस्ट के अधिकारियों ने रणनीति बनाई है कि वैशाखी के पर्व के बाद पैदल मार्ग से बर्फ हटाने का काम युद्ध स्तर पर शुरू किया जाएगा। सेना के जवान आधुनिक मशीनों और पारंपरिक औजारों की मदद से बर्फ को काटकर रास्ता बनाएंगे ताकि 23 मई को कपाट खुलने तक श्रद्धालु सुरक्षित रूप से धाम पहुंच सकें।

23 मई को खुलेंगे लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट

हेमकुंड साहिब के साथ ही प्रसिद्ध लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट भी 23 मई को खोले जाने हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे मौसम और बर्फबारी के अपडेट को ध्यान में रखकर ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं। आने वाले दिनों में सेना और ट्रस्ट के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक होगी, जिसमें यात्रा मार्ग को सुचारु करने की अंतिम योजना तैयार की जाएगी।