Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तराखंड की राजनीति में वर्ष 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अभी से चुनावी मोर्चा संभाल लिया है। मिशन-2027 के लक्ष्य को साधने के लिए भाजपा ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय महाप्रशिक्षण अभियान की शुरुआत का ऐलान कर दिया है। इस अभियान के जरिए पार्टी न केवल अपने संगठनात्मक ढांचे को धार देने जा रही है, बल्कि कार्यकर्ताओं को वैचारिक और चुनावी दृष्टि से इतना सशक्त बनाने की तैयारी है कि वे विपक्ष की रणनीतियों का प्रभावी जवाब दे सकें।
17 फरवरी से देहरादून में होगी अभियान की औपचारिक शुरुआत
भाजपा के इस महाप्रशिक्षण अभियान की औपचारिक शुरुआत 17 फरवरी को देहरादून में आयोजित प्रांतीय कार्यशाला से होगी। इसके बाद सात मार्च से 20 मार्च तक प्रदेश के सभी 304 मंडलों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी का उद्देश्य है कि संगठन की अंतिम पंक्ति तक कार्यकर्ताओं को एक समान सोच, दिशा और रणनीति से जोड़ा जाए।
दिल्ली रोडमैप के बाद उत्तराखंड भाजपा एक्शन मोड में
पांच फरवरी को दिल्ली में हुई भाजपा की राष्ट्रीय कार्यशाला के बाद उत्तराखंड इकाई पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। राष्ट्रीय नेतृत्व से मिले दिशा-निर्देशों के आधार पर पार्टी अब राज्यभर में इस अभियान को धरातल पर उतारने जा रही है, ताकि आगामी चुनाव से पहले संगठन पूरी तरह तैयार नजर आए।
महाप्रशिक्षण के लिए बनी छह सदस्यीय समिति
अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार को संयोजक बनाते हुए छह सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति में प्रदेश मंत्री नेहा जोशी के साथ हिमांशु संगतानी, रमेश चौहान, ऋषि कंडवाल और प्रदीप बिष्ट को शामिल किया गया है। यह टीम पूरे राज्य में प्रशिक्षण कार्यक्रमों की निगरानी और संचालन करेगी।
अनुशासित और वैचारिक कैडर तैयार करने पर फोकस
भाजपा का मानना है कि हाल के वर्षों में पार्टी से जुड़े लाखों नए सदस्यों को केवल संगठन से जोड़ना पर्याप्त नहीं है। उन्हें पार्टी की मूल विचारधारा, एकात्म मानववाद, अंत्योदय और राष्ट्रवाद जैसे सिद्धांतों से जोड़कर अनुशासित कैडर के रूप में तैयार करना जरूरी है। इसी सोच के तहत महाप्रशिक्षण अभियान को बेहद अहम माना जा रहा है।
प्रशिक्षण में क्या-क्या होगा शामिल
प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार के अनुसार प्रशिक्षण के दौरान कार्यकर्ताओं को पार्टी की रीति-नीति, इतिहास और उपलब्धियों की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही पहाड़ की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान, राष्ट्र निर्माण में भूमिका, समाज के प्रति दायित्व, इंटरनेट और सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग, चुनाव प्रबंधन और विपक्ष के नैरेटिव का जवाब देने की रणनीतियों पर भी विशेष सत्र होंगे। केंद्र और राज्य सरकार के प्रमुख निर्णयों और योजनाओं की जानकारी भी प्रशिक्षण का अहम हिस्सा होगी।
विधायकों और जनप्रतिनिधियों को भी मिलेगा प्रशिक्षण
महाप्रशिक्षण अभियान के पहले चरण में मंडल स्तर पर कार्यक्रम होंगे। इसके बाद अगले चरण में सभी 19 सांगठनिक जिलों की इकाइयों, विधायकों, निकाय और पंचायत प्रतिनिधियों के लिए भी प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। बूथ और शक्ति केंद्र स्तर के कार्यकर्ताओं के लिए वर्चुअल प्रशिक्षण की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है।




