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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भगवान बदरीविशाल की पावन नगरी बदरीनाथ धाम अब अपने नए और भव्य स्वरूप में निखरने लगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट 'बदरीनाथ मास्टर प्लान' के तहत पुनर्निर्माण कार्यों ने अब निर्णायक गति पकड़ ली है। प्रथम चरण के कार्यों की सफलता के बाद अब दूसरे चरण (Second Phase) का काम भी जोर-शोर से शुरू हो गया है। इस महायोजना का लक्ष्य धाम की पौराणिक और आध्यात्मिक पहचान को बरकरार रखते हुए इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस एक आदर्श तीर्थ नगरी के रूप में विकसित करना है, जिससे भविष्य में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन का लाभ मिल सके।

पहले चरण की सफलता के बाद बदली धाम की तस्वीर

मास्टर प्लान के पहले चरण में रिवरफ्रंट डेवलपमेंट, अराइवल प्लाजा और मंदिर के आसपास के सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया था। अलकनंदा नदी के किनारों को सुरक्षित करने के साथ-साथ घाटों का विस्तार किया गया है, जिससे अब धाम का प्रवेश द्वार काफी चौड़ा और भव्य नजर आने लगा है। शेषनेत्र झील और बदरीश झील का पुनरुद्धार भी इसी कड़ी का हिस्सा था, जिसने धाम की प्राकृतिक सुंदरता में चार चांद लगा दिए हैं। पहले फेज के कार्यों ने ही यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में बदरीनाथ धाम का स्वरूप वैश्विक स्तर के धार्मिक केंद्रों की टक्कर का होगा।

दूसरे चरण में इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी पर जोर

दूसरे चरण के कार्यों के तहत अब मंदिर परिसर के आंतरिक रास्तों के चौड़ीकरण, विशेष लाइटिंग व्यवस्था और तीर्थयात्रियों के लिए अत्याधुनिक प्रतीक्षालय (Waiting Area) के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया गया है। मास्टर प्लान के अनुसार, बदरीनाथ धाम में भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) को बेहतर बनाने के लिए क्यू मैनेजमेंट सिस्टम को भी अपग्रेड किया जा रहा है। निर्माण कार्यों में स्थानीय पत्थरों और पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला का उपयोग किया जा रहा है ताकि धाम की प्राचीन चमक फीकी न पड़े। भारी बर्फबारी और विषम परिस्थितियों के बावजूद मजदूर और इंजीनियर दिन-रात इस संकल्प को पूरा करने में जुटे हुए हैं।

श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा का रखा गया खास ध्यान

जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग का मुख्य उद्देश्य यह है कि मास्टर प्लान पूरा होने के बाद बदरीनाथ धाम में यात्रियों को ठहरने, आवाजाही और दर्शन करने में किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। पुनर्निर्माण के दौरान इस बात का भी विशेष ध्यान रखा गया है कि मंदिर की मूल संरचना और मान्यताओं के साथ कोई छेड़छाड़ न हो। चमोली के जिलाधिकारी लगातार कार्यों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं ताकि गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। जैसे-जैसे प्रोजेक्ट आगे बढ़ रहा है, स्थानीय व्यापारियों और तीर्थ पुरोहितों में भी पर्यटन बढ़ने की उम्मीद के चलते भारी उत्साह देखा जा रहा है।