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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : केदारनाथ धाम के लिए प्रस्तावित रोपवे परियोजना को जमीन पर उतारने से पहले सड़क और पुलों की मजबूती सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आ रही है। निर्माण एजेंसी ब्रिडकुल के अनुसार रोपवे में इस्तेमाल होने वाली मशीनें और सामग्री सामान्य परियोजनाओं की तुलना में कहीं ज्यादा भारी, लंबी और तकनीकी रूप से संवेदनशील होंगी। ऐसे में मौजूदा सड़कों और पुलों की क्षमता को बढ़ाए बिना रोपवे का निर्माण संभव नहीं है।

रुद्रप्रयाग से केदारनाथ तक जाने वाला गुप्तकाशी–सीतापुर–सोनप्रयाग मार्ग इस परियोजना का मुख्य आधार है, लेकिन यही हिस्सा सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण भी है। गुप्तकाशी से सीतापुर के बीच कई स्थानों पर सड़क बेहद संकरी है। पहाड़ी कटान और तीखे मोड़ों के कारण बड़े ट्रेलर और भारी वाहनों की आवाजाही कठिन हो जाती है।

इस खंड में कई जगह सड़क की चौड़ाई 6 से 7 मीटर से भी कम है, जबकि रोपवे निर्माण के लिए आने वाली भारी केबल रील और टावर के हिस्सों को लाने के लिए कम से कम 10 से 12 मीटर चौड़ाई की आवश्यकता होगी।

सोनप्रयाग तक का मार्ग भूस्खलन की जद में

सीतापुर से सोनप्रयाग तक का रास्ता भूस्खलन की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है। यहां सड़क नदी के बिल्कुल किनारे से गुजरती है और शोल्डर लगभग नहीं के बराबर हैं। कई जगहों पर सड़क अस्थायी सुधारों के सहारे टिकी हुई है।

सोनप्रयाग बाजार क्षेत्र में जगह की कमी के कारण भारी वाहनों की आवाजाही पहले से ही मुश्किल है, जबकि रोपवे की समस्त सामग्री सड़क मार्ग से यहीं तक पहुंचेगी। इसके आगे गौरीकुंड से केदारनाथ तक केवल पैदल मार्ग है।

टेंशनिंग सिस्टम से पुलों पर बढ़ेगा अतिरिक्त दबाव

रोपवे में उपयोग होने वाली हॉल रोप और कैरियर रोप विशाल स्टील केबल रील में आती हैं, जिनका वजन सैकड़ों टन तक होता है। इन्हें ढोने के लिए बड़े ट्रेलर, चौड़े मोड़ और अत्यधिक मजबूत पुलों की जरूरत होगी।

इसके अलावा रोपवे टावरों के प्री-फैब्रिकेटेड स्टील सेगमेंट, ड्राइव और रिटर्न स्टेशन की मशीनरी जैसे बुल-व्हील, हाई टॉर्क मोटर और गियरबॉक्स भी अत्यधिक भारी होते हैं। टेंशनिंग सिस्टम और काउंटर-वेट के कारण पुलों पर सामान्य से कहीं अधिक एक्सल-लोड पड़ेगा।

पुराने पुलों पर खतरा, स्ट्रक्चरल ऑडिट जरूरी

सोनप्रयाग में मंदाकिनी नदी पर बना प्रमुख पुल सामान्य यातायात के लिए डिजाइन किया गया है। रोपवे निर्माण के दौरान इसी पुल से सैकड़ों टन वजन वाली मशीनरी को गुजरना होगा, जिसके लिए इसकी भार वहन क्षमता बढ़ाना अनिवार्य है।

इसी तरह सीतापुर और गुप्तकाशी क्षेत्र के कई छोटे स्पैन वाले पुल पुराने डिजाइन पर आधारित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बेयरिंग और गर्डर को मजबूत किए बिना इन पुलों से भारी ट्रेलर गुजरना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए इन सभी पुलों का स्ट्रक्चरल ऑडिट और री-इन्फोर्समेंट आवश्यक बताया गया है।

लोक निर्माण विभाग के अनुसार केदारनाथ मार्ग पर पुलों की क्षमता बढ़ाने और संकरी सड़कों के चौड़ीकरण का कार्य शुरू कर दिया गया है, ताकि रोपवे निर्माण शुरू होने से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की जा सकें।