Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अमेरिका के मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को न्यायपालिका ने अब तक का सबसे बड़ा झटका दिया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (20 फरवरी, 2026) को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए ट्रंप प्रशासन द्वारा थोपे गए 'मनमाने' टैरिफ (आयात शुल्क) को अवैध घोषित कर रद्द कर दिया है। अदालत के इस फैसले ने न केवल ट्रंप की व्यापारिक नीतियों पर लगाम लगाई है, बल्कि भारतीय निर्यातकों के लिए खुशियों की सौगात भी दी है।
संवैधानिक मर्यादा की जीत: क्यों रद्द हुए ट्रंप के टैरिफ?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति 'अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम' (IEEPA) का हवाला देकर बिना अमेरिकी कांग्रेस (संसद) की मंजूरी के अपनी मर्जी से भारी-भरकम टैक्स नहीं थोप सकते। अदालत ने कहा कि व्यापारिक शुल्क तय करना विधायी ढांचा है, जो कांग्रेस के अधिकार क्षेत्र में आता है। इस फैसले के बाद अब व्हाइट हाउस के पास मनमाने ढंग से दूसरे देशों के सामान पर टैक्स बढ़ाने की शक्ति नहीं रही।
भारतीय निर्यातकों के लिए 'गेम चेंजर' साबित होगा यह फैसला
पिछले काफी समय से ट्रंप प्रशासन की अनिश्चित व्यापार नीतियों के कारण भारतीय व्यापारी सहमे हुए थे। खास तौर पर कपड़ा (Textile), रत्न एवं आभूषण (Gems & Jewelry), इंजीनियरिंग सामान, ऑटो पार्ट्स और रसायनों के निर्यात पर संकट के बादल मंडरा रहे थे। अब इस फैसले के बाद:
व्यापारिक स्थिरता: अमेरिकी बाजार में भारतीय सामानों की मांग बढ़ेगी और अनिश्चितता का जोखिम खत्म होगा।
बिजनेस प्लानिंग: निर्यातक अब लंबी अवधि के लिए व्यापारिक योजनाएं बना सकेंगे।
रिफंड की उम्मीद: जिन भारतीय कंपनियों ने पहले भारी शुल्क का भुगतान किया है, उनके लिए अब रिफंड मिलने के रास्ते भी खुल सकते हैं।
भारत का पक्ष होगा मजबूत: मार्च में हो सकता है बड़ा समझौता
अब तक ट्रंप अपनी शर्तों पर शुल्क तय करते थे, लेकिन अब शक्ति वापस अमेरिकी कांग्रेस के पास लौट आई है। इससे किसी भी नए शुल्क को लागू करने से पहले पारदर्शी चर्चा और जांच अनिवार्य होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक बातचीत अधिक व्यवस्थित होगी। मार्च 2026 में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, जिसमें शुल्क दरों को घटाकर 18% तक लाने का प्रस्ताव विचाराधीन है।
स्टील और एल्युमीनियम पर राहत नहीं, पर वैश्विक सप्लाई चेन में बढ़ेगा दबदबा
हालांकि, भारतीय स्टील और एल्युमीनियम सेक्टर के लिए खबर थोड़ी मिली-जुली है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 'व्यापार विस्तार अधिनियम 1962 की धारा 232' (राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर लगाए गए टैक्स) पर इस फैसले का असर नहीं पड़ेगा। यानी इन क्षेत्रों पर पुराने कर फिलहाल लागू रहेंगे।
बावजूद इसके, चीन, कनाडा और मैक्सिको जैसे देशों पर ट्रंप द्वारा लगाए गए सख्त टैरिफ में ढील मिलने से वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति मजबूत होगी। कई दिग्गज अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अब चीन के विकल्प के रूप में भारत की ओर रुख कर रही हैं, जिससे भारतीय विनिर्माण क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलेगी और कुल निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।




