Prabhat Vaibhav,Digital Desk : केरल की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब उच्च न्यायालय ने पूर्व मंत्री और लोकतांत्रिक केरल कांग्रेस के दिग्गज नेता एंटनी राजू को तगड़ा झटका दिया। कोर्ट ने उनके खिलाफ चल रहे सबूतों से छेड़छाड़ के मामले को रद्द करने की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। जस्टिस की पीठ के इस सख्त रुख के बाद अब एंटनी राजू के राजनीतिक भविष्य और आगामी चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर काले बादल मंडराने लगे हैं। वर्षों पुराने इस हाई-प्रोफाइल मामले में कोर्ट के इस फैसले ने न केवल विपक्षी दलों को हमलावर होने का मौका दे दिया है, बल्कि सत्ताधारी गठबंधन के भीतर भी हलचल पैदा कर दी है।
क्या है 34 साल पुराना 'अंडरवियर' कांड और सबूतों से छेड़छाड़ का मामला?
यह मामला साल 1990 का है, जब एक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक को ड्रग्स तस्करी के आरोप में तिरुवनंतपुरम में गिरफ्तार किया गया था। उस समय एंटनी राजू एक वकील के रूप में कार्यरत थे। आरोप है कि उन्होंने आरोपी को बचाने के लिए अदालत में पेश किए गए मुख्य सबूत (एक अंडरवियर) के साथ छेड़छाड़ की थी, जिससे वह आरोपी को फिट नहीं हुआ और उसे रिहाई मिल गई। बाद में जांच में खुलासा हुआ कि सबूत के तौर पर रखे गए कपड़े को छोटा कर दिया गया था। इसी जालसाजी और अदालत को गुमराह करने के गंभीर आरोपों को लेकर उन पर कानूनी शिकंजा कसा हुआ है, जिसे रद्द कराने के लिए वे हाईकोर्ट पहुंचे थे।
अदालत ने याचिका खारिज कर दिया कड़ा संदेश
केरल हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि न्याय प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे प्रारंभिक स्तर पर रद्द नहीं किया जा सकता और कानून को अपना काम करने देना चाहिए। इस फैसले का अर्थ है कि एंटनी राजू को अब निचली अदालत में ट्रायल का सामना करना होगा। कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि इस मामले में सजा होती है, तो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत उनकी सदस्यता और चुनाव लड़ने की योग्यता पर स्थायी रूप से खतरा पैदा हो सकता है।
चुनावी बिसात पर बढ़ेगी एंटनी राजू की मुश्किलें
जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, इस कानूनी झटके ने एंटनी राजू की राजनीतिक राह को और अधिक कठिन बना दिया है। विपक्षी दल 'यूडीएफ' और 'बीजेपी' ने इसे नैतिकता का मुद्दा बताते हुए उनके इस्तीफे और सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाने की मांग शुरू कर दी है। दूसरी ओर, एंटनी राजू के समर्थकों का दावा है कि यह एक राजनीतिक साजिश है और वे इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। फिलहाल, कोच्चि से लेकर तिरुवनंतपुरम तक इस फैसले की गूंज है और हर किसी की नजर अब इस बात पर टिकी है कि 'एलडीएफ' गठबंधन अपने इस सहयोगी नेता को लेकर क्या रुख अपनाता है।
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