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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : बिहार में मानसून से पहले ही गर्मी ने अपने रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। जमुई जिले के झाझा में बुधवार को पारा 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, जिसने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। अप्रैल के महीने में ही मई-जून जैसी तपिश ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। भीषण गर्मी और लू (Heatwave) के चलते दोपहर के समय बाजारों और सड़कों पर कर्फ्यू जैसा सन्नाटा पसरा नजर आ रहा है।

स्कूली बच्चों और किसानों पर दोहरी मार

भीषण गर्मी का सबसे बुरा असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। हालांकि सरकारी स्कूलों का समय बदलकर दोपहर 12:30 बजे तक कर दिया गया है, लेकिन कई निजी और केंद्रीय विद्यालयों में कक्षाएं दोपहर 2:20 बजे तक चल रही हैं। तपती धूप में घर लौटते मासूम बच्चों का बुरा हाल है। वहीं, खेतों में काम करने वाले किसान भी इस 'अग्निकाल' से त्रस्त हैं। तेज धूप के कारण किसानों के चेहरे झुलसने लगे हैं और दोपहर में खेतों में खड़ा रहना भी नामुमकिन हो गया है।

बाजारों में सन्नाटा, ठंडी चीजों की बढ़ी डिमांड

गर्मी के कारण झाझा के मुख्य बाजार का मिजाज बदल गया है। सुबह और शाम तो चहल-पहल रहती है, लेकिन दोपहर होते ही दुकानें खुली होने के बावजूद ग्राहक नदारद रहते हैं। दूसरी ओर, गर्मी से राहत पाने के लिए लोग तरबूज, लस्सी, जूस, खीरा और ककड़ी का सहारा ले रहे हैं, जिससे इन चीजों की बिक्री और दामों में अचानक उछाल आया है। पेयजल संकट की आहट ने भी ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।

अस्पतालों में विशेष तैयारी: डॉक्टर ने दी सावधानी बरतने की सलाह

अस्पताल प्रभारी डॉ. नवाब के अनुसार, गर्मी की वजह से ओपीडी में मरीजों की संख्या में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। अस्पताल में हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन से निपटने के लिए ओआरएस (ORS) और जरूरी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया गया है। डॉ. सदाब अहमद ने लोगों को सलाह दी है कि:

खाली पेट घर से बाहर न निकलें।

मसालेदार भोजन से परहेज करें और ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं।

भोजन में कद्दू, खीरा, तरबूज और हरी सब्जियों को शामिल करें।

मौसम विभाग की मानें तो अगले एक हफ्ते तक तापमान में गिरावट के आसार नहीं हैं। ऐसे में लोगों को अभी और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।