img

Prabhat Vaibhav, Digital Desk : तमिलनाडु की राजनीति में उस वक्त उबाल आ गया जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक बेहद विवादित टिप्पणी कर दी। खड़गे ने कथित तौर पर पीएम मोदी को 'आतंकवादी' कहा, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे देश के 145 करोड़ लोगों का अपमान बताते हुए मोर्चा खोल दिया है। भाजपा ने इस मामले में चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है।

खड़गे ने वास्तव में क्या कहा?

तमिलनाडु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए खड़गे एआईएडीएमके (AIADMK) पर निशाना साध रहे थे। उन्होंने कहा:

"अन्नादुराई की तस्वीर लगाने वाले एआईएडीएमके सदस्य मोदी का समर्थन कैसे कर सकते हैं? वह एक आतंकवादी है। उसकी पार्टी समानता और न्याय में विश्वास नहीं करती। ये लोग उनके साथ हाथ मिलाकर लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं।"

भाजपा का तीखा पलटवार: 'मानसिक दिवालियापन'

इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर करारा प्रहार किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा:

लोकतंत्र का अपमान: "लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रधानमंत्री के लिए ऐसी असंसदीय टिप्पणी अक्षम्य और निंदनीय है। यह कांग्रेस के मानसिक दिवालियापन को दर्शाता है।"

145 करोड़ लोगों का अपमान: योगी ने कहा कि पीएम के खिलाफ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल देश की जनता का अपमान है और कांग्रेस को इसके लिए सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए।

वहीं, भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस को 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' और 'शहरी नक्सल' विचारधारा वाली पार्टी बताया। पार्टी का तर्क है कि जब भी कांग्रेस विकास के मुद्दों पर घिरती है, तो वह इसी तरह के भड़काऊ बयान देकर ध्यान भटकाने की कोशिश करती है।

विवाद बढ़ा तो खड़गे ने दी सफाई

देशव्यापी विरोध और चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज होने के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने बयान पर सफाई पेश की। उन्होंने कहा:

"मैंने यह नहीं कहा कि पीएम मोदी आतंकवादी हैं। मेरे कहने का मतलब यह था कि वह हमेशा विपक्षी दलों और लोगों को धमकाते और डराते हैं। ईडी, आईटी और सीबीआई जैसी एजेंसियां उनके नियंत्रण में हैं और वे इनका इस्तेमाल डराने के लिए करते हैं।"

क्या है कानूनी स्थिति?

भाजपा ने चुनाव आयोग से मांग की है कि खड़गे के खिलाफ 'आदर्श आचार संहिता' (Model Code of Conduct) के उल्लंघन के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। आयोग अब इस बयान की रिकॉर्डिंग और संदर्भ की जांच करेगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बयान से तमिलनाडु और अन्य चुनावी राज्यों में ध्रुवीकरण बढ़ सकता है।